Nifty-Gold Ratio क्या है, 1.5 तक गिरा, क्या अब शेयर बाजार में आएगी तेजी या अभी हावी रहेगा सोना?

शेयर बाजार और सोने दो विरोधाभासी एसेट्स माना गया है। आमतौर पर दोनों एसेट्स को पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ताकि एक घटे, तो दूसरा बढ़े। इसके साथ ही इनके बीच कुछ ऐसे संबंध होते हैं, जो आगे की दिशा भी दिखाते हैं।

Nifty Gold Ratio: शेयर बाजार और सोने के बीच एक खास संतुलन रहता है। आमतौर पर दोनों विरोधाभासी एसेट्स माना जाते हैं। जब परिस्थितियां अस्थिर होती हैं, अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने में निवेश बढ़ता है। जब परिस्थितियां स्थिर होती हैं, तो निवेशक रिस्क उठाते हैं और स्टॉक्स में निवेश बढ़ाते हैं। मौजूदा ग्लोबल हालात बेहद अस्थिर और अनिश्चितता से भरे हैं। गोल्ड उम्मीद के मुताबिक परफॉर्म नहीं कर रहा है। वहीं, शेयर बाजार में तबाही आई हुई है।

Nifty Gold Ratio

निफ्टी और गोल्ड रेश्यो एक अहम इंडिकेटर

बहरहाल, गोल्ड और भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क निफ्टी के बीच एक खास संतुलन रहता है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो दोनों में एक में जोरदार रैली देखने को मिलती है। इस संतुलन को निफ्टी गोल्ड रेश्यो कहा जाता है।

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