30 दिनों के बाद ई-वेरीफाई करने से क्या होता है?

ITR फाइल करने के 30 दिनों के बाद ई-वेरीफाई करने पर रिटर्न 'अवैध' मान लिया जाता है। ऐसे में 5,000 तक की पेनाल्टी लग सकती है, टैक्स रिफंड अटक जाता है और इसे 'लेट रिटर्न' की तरह ट्रीट किया जाता है।

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया केवल फॉर्म सबमिट करने से पूरी नहीं होती, बल्कि इसके बाद तय समय सीमा के भीतर इसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना बेहद अनिवार्य होता है, और ऐसा न करने पर टैक्सपेयर्स को गंभीर कानूनी और वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के संशोधित नियमों के अनुसार, अब आईटीआर (ITR) फाइल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन की समय सीमा को 120 दिनों से घटाकर केवल 30 दिन कर दिया गया है, जिसका सीधा मतलब यह है कि यदि कोई टैक्सपेयर अपना रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर उसे ई-वेरीफाई नहीं करता है, तो आयकर विभाग द्वारा उस रिटर्न को 'अवैध' यानी इनवैलिड (Invalid) मान लिया जाता है।

Income Tax e-Verification

30 दिनों की डेडलाइन बीत जाने के बाद आपका दाखिल किया गया आईटीआर इस तरह खारिज हो जाता है जैसे कि आपने कभी रिटर्न फाइल ही नहीं किया था, जिसके परिणामस्वरूप विभाग आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग रोक देता है और यदि आपका कोई टैक्स रिफंड (Tax Refund) बनता भी है, तो वह पूरी तरह से अटक जाता है और तब तक बैंक खाते में नहीं आता जब तक कि वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी न हो जाए।

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