भारत के शेयर बाजार में आज, सप्ताह के चौथे ट्रेडिंग दिन (30 अक्टूबर, गुरुवार) जोरदार गिरावट देखने को मिल रही है। मार्केट ओपनिंग से ही दबाव बना हुआ था और दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे। बाजार बंद होने के समय दोपहर 3.30 बजे बीएसई सेंसेक्स 592 अंक गिरकर 84,403.99 के स्तर हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 155 अंक की गिरावट के साथ 25,898 पर बंद हुआ। इस भारी गिरावट के बीच बीएसई के लार्ज कैप बॉस्केट में सिर्फ 7 शेयर हरे निशान में थे, जबकि 23 शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
बाजार की गिरावट में 3 लाख करोड़ रुपए डूबे
टॉप लूजर्स में सबसे आगे भारतीय एयरटेल रहा, जिसका शेयर 1.81% टूट गया। पावरग्रिड के शेयर में भी 1.42% की गिरावट देखी गई। सिर्फ कुछ सेक्टर्स ही नहीं, बल्कि निफ्टी 50, निफ्टी बैंक, निफ्टी स्मॉलकैप, निफ्टी ऑटो, निफ्टी FMCG और निफ्टी IT जैसे प्रमुख इंडेक्स में भी जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। कुल मिलाकर, आज बाजार में बिकवाली हावी है और निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 47,50,424.2 करोड़ रुपये से लुढ़ककर 47,15,641.64 करोड़ रुपये पर आ गया। यानी कुछ ही घंटों में निवेशकों की लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डूब गई।
बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स 369 अंकों की बढ़त के साथ 84,997.13 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी ने साल 2025 में पहली बार 26,000 के स्तर को पार करते हुए क्लोजिंग दी। यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा अब भी बना हुआ है और विदेशी फंड्स की आवक से बाजार को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।
क्यों गिरा शेयर बाजार?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की कटौती करते हुए इसे 3.75% से 4% के दायरे में कर दिया है। हालांकि, फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने साफ किया कि दिसंबर में एक और रेट कट की संभावना अभी तय नहीं है। इस बयान के बाद वॉल स्ट्रीट पर निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ। वहीं भारतीय बाजार पर भी इस बयान का साफ़ असर देखने को मिल रहा है।
कमोडिटी बाजार पर असर
वहीं, फेड के इस फैसले का असर कमोडिटी मार्केट पर भी देखने को मिल रहा है। सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई है। हालांकि वायदा बाजार अब बंद हो चुका है, लेकिन कारोबार के दौरान सोना ₹1,053 की बढ़त के साथ ₹1,19,646 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी ₹1,800 उछलकर ₹1,46,140 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
फेड रेट कट का बाजार पर क्या होगा असर?
दरअसल, जब अमेरिका ब्याज दरें घटाता है, तो विदेशी निवेशक (FIIs) उभरते हुए बाजारों जैसे भारत की ओर रुख करते हैं, क्योंकि यहां उन्हें ज्यादा रिटर्न की उम्मीद रहती है। इसका नतीजा यह होता है कि भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी जैसे इंडेक्स में तेजी देखने को मिल सकती है।
वहीं, ब्याज दरों में गिरावट के चलते डॉलर कमजोर हो सकता है, जिससे सोने की कीमतों में उछाल देखने की संभावना है। क्योंकि जब डॉलर कमजोर होता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में गोल्ड की तरफ रुख करते हैं। नतीजतन, अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारत में भी सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं।कुल मिलाकर, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती से वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ने वाली है। जहां अमेरिकी बाजार में निवेशकों की खरीदारी बढ़ सकती है, वहीं भारत जैसे उभरते बाजारों में भी शेयरों में तेजी और सोने में चमक देखने को मिल सकती है।
(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना देने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है और इसे किसी प्रकार की निवेश सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल अपने पाठकों/दर्शकों को सलाह देता है कि किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)
