अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर एक बार फिर ईरान (Iran) की उन संपत्तियों की चर्चा तेज हो गई है, जो दशकों से दुनिया के अलग-अलग देशों के बैंकों में कैद हैं। हालिया चर्चाओं के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप का एक संभावित फैसला ईरान की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए 'संजीवनी' साबित हो सकता है। हम बात कर रहे हैं उस भारी-भरकम 100 अरब डॉलर (लगभग 8.3 लाख करोड़ रुपये) की रकम की, जिसे अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के कारण 'फ्रीज' कर दिया गया था। अगर यह पैसा रिलीज होता है, तो न केवल ईरान बल्कि वैश्विक बाजार की तस्वीर भी बदल सकती है।
आखिर क्या होती हैं 'फ्रोजन एसेट्स'?
आम भाषा में समझें तो 'फ्रीजिंग एसेट्स' एक तरह की आर्थिक तालाबंदी है। जब कोई ताकतवर देश (जैसे अमेरिका) या कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था किसी दूसरे देश के बैंक खातों, संपत्ति या बिजनेस लेनदेन पर पाबंदी लगा देती है, तो वह पैसा बैंक में तो रहता है लेकिन उसका मालिक उसे निकाल नहीं पाता। ईरान के साथ यह सिलसिला 1979 की इस्लामी क्रांति के समय से चल रहा है। ईरान दुनिया को तेल बेचकर जो पैसा कमाता है, वह अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली (SWIFT) के जरिए उस तक नहीं पहुँच पाता क्योंकि अमेरिका ने उन रास्तों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं।
दुनिया के किन देशों में फसा है ईरान का पैसा?
ईरान की यह विशाल संपत्ति किसी एक जगह नहीं, बल्कि दुनिया के कई कोनों में बंटी हुई है। रिपोर्ट्स की मानें तो चीन के बैंकों में ईरान के करीब 20 अरब डॉलर फंसे हुए हैं। इसके बाद इराक में 6 अरब डॉलर, दक्षिण कोरिया और जापान में करीब 1.5 अरब डॉलर की रकम अटकी है। दिलचस्प बात यह है कि भारत में भी ईरान के लगभग 7 अरब डॉलर जमा हैं, जो कच्चे तेल की खरीद के बदले दिए जाने थे लेकिन प्रतिबंधों की वजह से अटके रह गए। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोपीय देशों के बैंकों में भी अरबों डॉलर की चल-अचल संपत्ति 'सीज' पड़ी है।
ईरान के लिए क्यों जरूरी है यह पैसा?
दशकों से लगे आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनावों ने ईरान की कमर तोड़ दी है। वहाँ महंगाई दर आसमान छू रही है और उनकी राष्ट्रीय करेंसी 'रियाल' की कीमत रिकॉर्ड स्तर तक गिर गई है। ईरान की बुनियादी सुविधाएं, जैसे अस्पताल, स्कूल और ट्रांसपोर्ट सिस्टम, जर्जर हाल में हैं। ईरान की सरकार का मानना है कि अगर यह 8.3 लाख करोड़ रुपये उन्हें मिल जाते हैं, तो वे अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा कर पाएंगे, बेरोजगारी कम होगी और देश में विकास के नए कार्य शुरू हो सकेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में ईरान के प्रति काफी सख्त रहे थे, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय समीकरण बदल रहे हैं। जानकार मानते हैं कि यदि ट्रंप प्रशासन किसी नई डील या समझौते के तहत इस पैसे को रिलीज करने का इशारा करता है, तो यह मध्य-पूर्व (Middle East) में शांति और स्थिरता की ओर एक बड़ा कदम हो सकता है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं है क्योंकि अमेरिका के भीतर और उसके सहयोगी देशों में ईरान को लेकर गहरा अविश्वास है।
