Anti Dumping duty : भारत ने घरेलू उद्योगों को सस्ते विदेशी उत्पादों से बचाने के लिए हाल ही में दो चीनी प्रोडक्ट्स और वियतनाम के एक प्रोडक्ट पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम उस स्थिति में उठाया गया है जब विदेशी कंपनियां अपने सामान को घरेलू बाजार में सस्ते दामों पर बेचकर भारतीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल कर देती हैं।
भारत ने चीन और वियतनाम से सस्ते आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाया (तस्वीर-istock)
चीनी उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, भारत ने कुछ चीनी इस्पात उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है। कुछ कंपनियों पर प्रति टन 223.82 डॉलर का शुल्क लागू किया गया है, जबकि अन्य कंपनियों के लिए यह शुल्क 415 डॉलर प्रति टन है। इसके अलावा, रेफ्रिजरेंट गैस पर भी पांच साल के लिए 5,251 डॉलर प्रति टन तक का डंपिंग रोधी शुल्क लगाया गया है। इसका मकसद घरेलू इस्पात और रसायन उद्योग को सस्ते विदेशी आयात से बचाना है।
वियतनाम से आयातित उत्पाद पर शुल्क
इसके अलावा, भारत ने वियतनाम से आयात होने वाले ‘कैल्शियम कार्बोनेट फिलर मास्टरबैच’ पर भी डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है। यह उत्पाद प्लास्टिक उद्योग में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इस कदम का उद्देश्य भी घरेलू प्लास्टिक उद्योग की सुरक्षा करना और उन्हें विदेशी सस्ते उत्पादों से होने वाली चुनौती से बचाना है।
डंपिंग रोधी शुल्क क्या है, कैसे तय होते हैं
डंपिंग रोधी शुल्क तब लगाए जाते हैं जब वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई, व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR), किसी प्रोडक्ट पर जांच करती है। DGTR यह पता लगाती है कि क्या विदेशी कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को भारतीय बाजार में उनके वास्तविक मूल्य से कम दाम पर बेच रही हैं। जांच पूरी होने के बाद DGTR अपनी सिफारिश देती है और मंत्रालय उस पर आधारित डंपिंग रोधी शुल्क तय करता है। यह शुल्क आम तौर पर कुछ सालों के लिए लागू किया जाता है।
घरेलू उद्योग के लिए लाभ
इस तरह के डंपिंग रोधी शुल्क घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इससे भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में बराबरी का मौका मिलता है और वे अपने उत्पादों को बेहतर दाम पर बेच सकती हैं। साथ ही, यह उपाय घरेलू रोजगार को भी सुरक्षित रखने में सहायक होता है।
