केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने सोमवार इस बात को लेकर चिंता जताई कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से ग्लोबल कमोडिटी प्राइस में तेजी आ रही है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
FM Nirmala Sitharaman (Video Grab/ X Handle@nsitharamanoffc)
तेल की कीमतों में लगातार बना हुआ उतार-चढ़ाव
उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं और इनमें लगातार बदलाव हो रहा है। पिछले 80-90 दिनों से तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।”
वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर फॉरन एक्सचेंज मार्केट पर पड़ रहा है। कच्चा तेल और सोने का आयात महंगा होने से फॉरेक्स आउटफ्लो बढ़ सकता है। भारत पहले ही बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर ट्रेड डेफिसिट और करंट अकाउंट बैलेंस पर भी पड़ सकता है।
फर्टिलाइजर और सोने की बढ़ती कीमतें भी चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हाल ही में फॉरन एक्सचेंज बचाने की अपील का बचाव करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इसे ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनैतिक तनाव की वजह से बढ़ती इंपोर्ट कॉस्ट के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्टिलाइजर की कीमतों में कल्पना से परे बढ़ोतरी और सोने की ऊंची कीमतों जैसी चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। इन सभी आयातों के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है।
संकट का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है
उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि हर किसी को Fuel, Fertiliser और Foreign Exchange के संदर्भ को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संकट केवल डिप्लॉमैटिक या जियोपॉलिटिकल इशू नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर कारोबार और आम लोगों पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, “व्यापार और आम लोगों के लिए इसका मतलब ईंधन की बढ़ती कीमतें, कार्गो डिलीवरी में देरी, महंगी शिपिंग, जरूरी सामानों की कमी, वर्किंग कैपिटल पर दबाव और एक्सपोर्ट्स ऑर्डर्स को लेकर अनिश्चितता हो सकता है।”
डर फैलाने की स्थिति नहीं कर सकते बर्दाश्त
हालांकि इन वैश्विक चुनौतियों के बीच भी वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। उन्होंने अर्थव्यवस्था को लेकर डर फैलाने से बचने की सलाह देते हुए कहा, "भारत डर फैलाने की स्थिति बर्दाश्त नहीं कर सकता। हमें अपने शब्दों और अपने काम, दोनों के जरिए लोगों में भरोसा पैदा करने की जरूरत है।"
