Vedanta Demerger Plan: वेदांता की मार्केट कैपिटल 1.65 लाख करोड़ रु है। मगर वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल कंपनी के टुकड़े करने जा रहे हैं। अनिल अग्रवाल दुनिया के टॉप अरबपतियों में शामिल हैं। उनकी नेटवर्थ करीब 35000 करोड़ रु है। हालांकि अनिल अग्रवाल की धातु और खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता की डीमर्जर योजना रुक गई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एनसीएलटी ने वेदांता बेस मेटल्स की अघोषित देनदारी के कारण इसे रद्द कर दिया और इसका पूरी वैल्यू अभी तक सामने नहीं आई है। हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका डीमर्जर होगा और ये प्लान अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में पूरा हो सकता है।
6 कंपनियों में बंटेगी वेदांता
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क्या होगा वेदांता का प्लान
एक्सिस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, "डीमर्जर के बाद भी कंपनी की वैल्यू में ग्रोथ की उम्मीद है, खास तौर पर एल्युमीनियम कारोबार से। वहीं कंपनी एनसीएलटी समेत सभी जरूरी मंजूरियां लेकर दूसरे प्रस्ताव के साथ आगे बढ़ेगी और साथ ही साथ डीमर्जर की गई कंपनियों को माइनिंग लीज और अन्य एसेट्स के ट्रांसफर की दिशा में काम करेगी।
डीमर्जर का उद्देश्य
वेदांता का अपने डीमर्जर के जरिए उद्देश्य कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को सरल बनाना, निवेश विकल्प ऑफर करना, बाजारों के मुताबिक रणनीतियों को बेहतर बनाना और अपनी सभी एसेट्स की वैल्यू को अनलॉक करना है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि डीमर्जर प्रोसेस को वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में अंतिम रूप दिया जाएगा।
कर्ज का क्या होगा
अलग होने वाली इकाइयों में कर्ज के बंटवारे के लिए एक्सिस सिक्योरिटीज के अनुसार, "वेदांता लिमिटेड के कर्ज का 70% अलग हो चुके एल्युमीनियम कारोबार को, 10% ओएंडजी को, 3% स्टील और फेरस को, 2% पावर को और बाकी 15% शेष वेदांता लिमिटेड को सौंपा गया है।"
किन कंपनियों में बंटेगी वेदांता
2023 में वेदांता के बोर्ड ने छह अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में विभाजन को मंजूरी दे दी। इनमें वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता पावर, वेदांता स्टील एंड फेरस मैटेरियल्स, वेदांता बेस मेटल्स और वेदांता शामिल हैं।
