अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी महायुद्ध 19वें दिन में पहुंच गया है। यह युद्ध कब थमेगा यह किसी को पता नहीं! ईरान के तेहरान से लेकर तमाम शहरों पर अमेरिका और इजरायल की भीषण बमबारी के बावजूद सुलह या युद्ध रुकने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अब ईरान ने इजरायली हमलों में अपने सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की मौत का बदला लेने संकल्प लिया है। अब सवाल उठता है कि आखिर ईरान के पास वो कौन सी ताकत है जो अमेरिका जैसे सुपरा पावर को पानी पिला रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बहाने दुनियाभर के देशों से मदद मांग रहे हैं लेकिन कोई आगे बढ़कर नहीं आ रहा है। आइए आपको ईरान की वो 'सीक्रेट' ताकत बताते हैं जो उसे दुनिया के कई देशों से बिल्कुल अलग करता है।
ईरान vs अमेरिका
1. तेल और गैस के दम पर मजबूत इकोनॉमी
अमेरिका से युद्ध में ईरान अपनी मजबूत इकोनॉमी के दम पर डटा हुआ है। ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसका तेल और गैस है। ईरान के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है (रूस के बाद)। वहीं, यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार रखने वाला देश है। इसके अलावा, ईरान के पास तांबा (Copper), जस्ता (Zinc), और लोहा (Iron Ore) का विशाल भंडार है। दुनिया का सबसे बड़ा तांबा भंडार ईरान के 'सरचश्मे' में है। इसके दम पर ईरान की GDP लगभग 400-450 अरब डॉलर के आसपास है। मजबूत इकोनॉमी ही ईरान को अमेरिका और इजरायल से मुकाबला करने की ताकत दे रहा है।
2. मिडिल ईस्ट का सबसे 'एजुकेटेड' मैनपावर
आपको जानकर शायद आश्चर्य होगा कि ईरान की सबसे बड़ी ताकत वहां की सेना नहीं, बल्कि वहां की पढ़ी-लिखी युवा आबादी है। ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सबसे अधिक इंजीनियर्स ग्रेजुएट होते हैं। नैनोटेक्नोलॉजी और स्टेम सेल रिसर्च में ईरान टॉप 10 देशों में आता है। ईरान की लगभग 70% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जो इसे भविष्य के लिए एक विशाल उपभोक्ता बाजार और मैनपावर हब बनाती है।
3. मिलिट्री और टेक्नोलॉजी की पावर
अमेरिका जैसी सुपरपावर और इज़रायल जैसे टेक्नोलॉजी में महारथ हासिल देशों को ईरान अगर टक्कर दे रहा है, तो वह अपनी मजबूत सैन्य ताकत और उन्नत तकनीक के दम पर दे रहा है। ईरान के पास मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा और विविध मिसाइल शस्त्रागार है। उसके 'शाहेद' (Shahed) ड्रोन्स ने ग्लोबल डिफेंस मार्केट में हलचल मचा दी है। ईरान को दुनिया की शीर्ष 5 'साइबर पावर' में गिना जाता है, जो डिजिटल युद्ध में बड़े देशों को टक्कर देने में सक्षम है।
4. दुनिया की 'शॉर्टकट' चाबी होर्मूज
ईरान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक जियो-पॉलिटिकल गेटवे भी है। ईरान के पास हिंद महासागर तक पहुंचने के सबसे महत्वपूर्ण चाहबहार और बंदर अब्बास बंदरगाह हैं। INSTC (International North-South Transport Corridor): यह भारत को रूस और यूरोप से जोड़ने वाला सबसे छोटा रास्ता है जो ईरान से होकर गुजरता है। यह बिजनेस के लिहाज से स्वेज नहर (Suez Canal) का सबसे बड़ा विकल्प है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' है जिसे दबाकर ईरान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला दिया है। ईरान की मुख्य भूमि और उसके कई द्वीप (जैसे आबू मूसा, कश्म) इस रास्ते के बिल्कुल बगल में हैं। ईरान यहाँ से किसी भी गुजरने वाले जहाज पर आसानी से नजर रख सकता है और उसे निशाना बना सकता है।
5. मजबूत भौगोलिक स्थिति
ईरान चारों तरफ से ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा है। पश्चिम में जाग्रोस (Zagros) और उत्तर में अल्बोर्ज (Alborz) पहाड़ियां एक दीवार की तरह खड़ी हैं। ये पहाड़ इतने ऊंचे और दुर्गम हैं कि यहां टैंक या भारी सेना के साथ घुसपैठ करना लगभग नामुमकिन है। ईरान ने अपनी 'मिसाइल सिटीज' इन्हीं पहाड़ों के सैकड़ों मीटर नीचे बनाई हैं, जहां 'बंकर बस्टर' बमों का असर भी बहुत कम होता है। ईरान के मध्य में दश्त-ए-कवीर और दश्त-ए-लुत जैसे विशाल नमक के रेगिस्तान हैं। ये दुनिया के सबसे गर्म और निर्जन इलाकों में से हैं। यहाँ का तापमान और खारी धूल आधुनिक मशीनों और रडार सिस्टम को खराब कर देती है। दुश्मन सेना अगर पहाड़ों को पार कर भी ले, तो इन रेगिस्तानों में फंसकर रसद (Supply Chain) के अभाव में दम तोड़ देगी।
