US Tariffs : अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले कुछ प्रोडक्ट्स पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का फैसला किया है। यह कदम उन देशों की नीतियों की समीक्षा के बाद उठाया गया है, जहां जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने सामान के आयात पर रोक लगाने से जुड़े नियमों की जांच की गई थी। हालांकि राहत की बात यह है कि अमेरिका ने पहले 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अंतिम फैसला 10 प्रतिशत शुल्क लगाने का लिया गया। भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, कंबोडिया और ब्रिटेन समेत कई अन्य देशों पर भी यही टैरिफ लागू किया गया है।
अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों पर लगाया अतिरिक्त टैरिफ
भारत ने बदली थी आयात नीति
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में कहा कि भारत ने जांच के दौरान जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने के लिए अपनी नीतियों में बदलाव किया है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत पर 12.5 प्रतिशत की जगह 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह फैसला राष्ट्रपति के निर्देश, सार्वजनिक सुझावों, एक्सपर्ट्स समितियों की सलाह और जांच के निष्कर्षों के आधार पर लिया गया है। भारत ने 14 जून 2026 को अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में संशोधन करते हुए जबरन मजदूरी से तैयार किए गए प्रोडक्ट्स के आयात पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान लागू किया था। अमेरिका ने इसे सकारात्मक कदम माना है।
किन देशों पर कितना टैरिफ?
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों ने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने का वादा किया है या ऐसे कानून लागू कर दिए हैं, उन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। वहीं, जो देश ऐसे नियम लागू नहीं करेंगे, उन्हें 12.5 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, कंबोडिया, श्रीलंका और ब्रिटेन सहित कुल 17 देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने आवश्यक कदम उठाने की दिशा में प्रगति दिखाई है।
अमेरिका ने क्यों उठाया यह कदम?
अमेरिका का कहना है कि जबरन मजदूरी से तैयार किए गए उत्पादों का व्यापार न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार में भी असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होती है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर ने कहा कि जिन देशों ने तेजी से कानून बनाए हैं, उनका स्वागत किया जाता है। अब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि इन नियमों का सही तरीके से पालन भी हो। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य दुनिया भर के श्रमिकों के हितों की रक्षा करना और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
कई देशों ने किए नए कानून लागू
USTR के अनुसार, भारत, कंबोडिया, ग्वाटेमाला, होंडुरास, श्रीलंका और त्रिनिदाद एवं टोबैगो जैसे देशों ने सरकारों के बीच हुई बातचीत के बाद जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके अलावा अब तक 10 व्यापारिक साझेदार देशों ने पारस्परिक व्यापार समझौतों के तहत ऐसे प्रतिबंध लागू करने पर सहमति जताई है।
एक और जांच भी जारी
अमेरिका ने मार्च 2026 में भारत सहित कुछ देशों के खिलाफ कुछ प्रोडक्ट्स की अधिक उत्पादन क्षमता को लेकर भी अलग जांच शुरू की थी। इस मामले में अभी अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं हुई है। इसलिए आने वाले समय में इस विषय पर भी अमेरिका की ओर से नए फैसले सामने आ सकते हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। दोनों देशों के बीच शुरुआती ढांचे पर सहमति बन चुकी है और उचित समय पर समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर के बीच बैठक हुई थी। इस दौरान व्यापार समझौते के पहले चरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने साफ किया है कि समझौते में उसके व्यापारिक हितों की रक्षा की जाएगी और पड़ोसी देशों की तुलना में भारत को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलना चाहिए।
क्या होगा आगे?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत द्वारा आयात नीति में बदलाव करने के कारण अमेरिका ने प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत की बजाय 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। आने वाले समय में यदि भारत इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करता है और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता आगे बढ़ता है, तो व्यापारिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं। वहीं, अमेरिका की अन्य जांचों के नतीजों पर भी भारत की नजर बनी रहेगी।
