भारत में 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026 से ठीक पहले अमेरिका से एक बड़ी खबर आई है, जिसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ने अपनी ताजा बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी बाजार की हलचल अक्सर दलाल स्ट्रीट का रुख तय करती है। वहीं, आज इकोनॉमिक सर्वे भी पेश होने वाला है और 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026 भी पेश होना है तो ऐसे में अमेरिकी फेड रिजर्व का फैसला भारतीय बाजार पर क्या असर डालेगा आइए जानते हैं?
ब्याज दरों पर 'पॉज' और पॉवेल का रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने जनवरी 2026 की दो दिवसीय बैठक के बाद स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के दायरे में ही रखा जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले दरों में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की कटौती की गई थी, जिससे बाजार को उम्मीद थी कि कटौती का यह सिलसिला जारी रहेगा। हालांकि, पॉवेल ने साफ कर दिया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी उस मोड़ पर नहीं पहुंची है जहाँ दरों को और कम किया जा सके। उन्होंने 'पॉलिसी में स्थिरता' को फिलहाल सबसे सही कदम बताया है।
महंगाई और टैरिफ की दोहरी मार
इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह महंगाई (Inflation) और टैरिफ (Import Duty) का बढ़ता दबाव है। पॉवेल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में माना कि हालांकि 2022 के मुकाबले महंगाई कम हुई है, लेकिन यह अभी भी उनके 2% के लक्ष्य से काफी दूर है। वर्तमान में कोर महंगाई 3% के आसपास बनी हुई है। सबसे ज्यादा चिंता 'टैरिफ' को लेकर जताई गई है। जब विदेशों से आने वाले सामान पर टैक्स बढ़ता है, तो आम चीजों की कीमतें ऊपर चली जाती हैं। पॉवेल को डर है कि अगर अभी दरें घटाई गईं, तो टैरिफ के कारण बढ़ी कीमतें महंगाई को फिर से बेकाबू कर सकती हैं।
सुस्त पड़ती नौकरियां और लेबर मार्केट
अमेरिकी इकॉनमी के लिए लेबर मार्केट से भी कुछ ठंडे संकेत मिले हैं। पॉवेल ने बताया कि पिछले तीन महीनों में औसतन हर महीने 22 हजार नौकरियां कम हुई हैं और बेरोजगारी दर 4.4% पर पहुंच गई है। उन्होंने इसके पीछे इमिग्रेशन (प्रवास) में कमी और वर्कफोर्स के सिकुड़ने को मुख्य कारण माना है। हालांकि लोग अभी भी खर्च कर रहे हैं और बिजनेस में निवेश बढ़ रहा है, लेकिन हाउसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती साफ नजर आ रही है।
बजट घाटा
जेरोम पॉवेल ने केवल ब्याज दरों पर ही बात नहीं की, बल्कि अमेरिका के बढ़ते सरकारी कर्ज और बजट घाटे पर भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का वित्तीय घाटा वर्तमान में एक ऐसे रास्ते पर है जिसे लंबे समय तक संभालना नामुमकिन होगा। इसके साथ ही, उन्होंने फेडरल रिजर्व की 'आजादी' (Independence) पर भी जोर दिया। पॉवेल का मानना है कि केंद्रीय बैंक को राजनीति से दूर रहना चाहिए ताकि जनता का भरोसा बना रहे और आर्थिक फैसले बिना किसी दबाव के लिए जा सकें।
भारतीय बजट और बाजार पर असर
अब सवाल यह है कि भारत पर इसका क्या असर होगा? जब अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर रहती हैं या बढ़ती हैं, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश करना पसंद करते हैं। बजट से ठीक पहले यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। निवेशकों को उम्मीद थी कि फेड दरें घटाएगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर भी दरें घटाने का दबाव बनेगा और होम लोन और कार लोन सस्ते होंगे। लेकिन अब, बजट के समय बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है।
