अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व (US Fed) ने अपनी ताजा बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। हालांकि दरों में बदलाव न होना सामान्य लग सकता है, लेकिन फेड के सख्त रुख और 'नो रेट कट' (ब्याज दरों में कटौती नहीं) के संकेतों ने पूरी दुनिया के शेयर बाजारों को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी बाजारों के धराशायी होने का सीधा असर एशियाई बाजारों और खास तौर से भारतीय शेयर बाजार (Sensex-Nifty) पर देखने को मिल रहा है। गुरुवार, 19 मार्च 2026 को भारतीय बाजारों की शुरुआत भारी गिरावट के साथ होने की आशंका है।
क्यों नहीं हुआ रेट कट?
फेडरल रिजर्व के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई और मिडिल ईस्ट (ईरान-इजराइल) में बढ़ता तनाव है। फेड के चेयरमैन ने संकेत दिए हैं कि जब तक महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। इस बयान के बाद अमेरिकी बाजार (Dow Jones और Nasdaq) लाल निशान में बंद हुए, जिससे ग्लोबल सेंटीमेंट खराब हो गया। इसका मतलब यह है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा सकते हैं, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव बढ़ेगा।
गुरुवार, 19 मार्च को एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है और चारों तरफ लाल निशान छाया हुआ है। जापान का प्रमुख इंडेक्स निक्केई (Nikkei) 1,504.09 अंक या 2.72% की बड़ी गिरावट के साथ 53,735.31 के स्तर पर आ गया है, वहीं टॉपिक्स (Topix) भी 2.18% टूटकर 3,636.38 पर कारोबार कर रहा है। दक्षिण कोरिया के बाजारों का हाल भी बुरा है; कोस्पी (KOSPI) 2.89% और कोस्डैक (KOSDAQ) 1.71% लुढ़क चुके हैं। इसके अलावा, हांगकांग का हैंगसैंग (Hang Seng) इंडेक्स भी पिछले सत्र में 1.82% की गिरावट के साथ 25,550.56 के स्तर पर बंद हुआ।
भारतीय बाजार के लिए भी संकेत बेहद डरावने हैं। GIFT Nifty में आज सुबह 550 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट देखी जा रही है। यह बुधवार के क्लोजिंग लेवल से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है, जिसका साफ मतलब है कि आज दलाल स्ट्रीट पर सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत एक बड़े गैप-डाउन के साथ होने वाली है।
भारतीय बाजार कैसा रहेगा?
भारतीय शेयर बाजार के लिए आज की ओपनिंग काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। 'गिफ्ट निफ्टी' (Gift Nifty) के संकेत बता रहे हैं कि बाजार एक बड़े 'गैप-डाउन' के साथ खुल सकता है। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि अगर निफ्टी अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़ता है, तो बिकवाली का दौर और तेज हो सकता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे निवेशक इस समय जोखिम लेने से बच रहे हैं और मुनाफ़ा वसूली (Profit Booking) को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कच्चा तेल का हाल
शेयर बाजार के अलावा कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें इस आग में घी डालने का काम कर रही हैं। ईरान संकट की वजह से कच्चा तेल पहले ही 150 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ रहा है। फेड के फैसले और तेल की महंगाई का यह 'डबल अटैक' भारतीय रुपये को कमजोर कर सकता है। जब डॉलर मजबूत होता है और कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत के लिए आयात (Import) महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा, क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें जैसे फल, सब्जी और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ जाएगी।
आपके म्यूचुअल फंड और स्टॉक पोर्टफोलियो में आज गिरावट दिख सकती है। दूसरा, अगर आप होम लोन या कार लोन की ईएमआई (EMI) कम होने का इंतजार कर रहे थे, तो फेड के इस फैसले के बाद आरबीआई (RBI) भी शायद जल्द ही ब्याज दरें न घटाए। यानी आपकी ईएमआई का बोझ अभी कम होने वाला नहीं है। महंगाई के मोर्चे पर भी फिलहाल राहत मिलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
