US फेड ने लगातार तीसरी बार नहीं घटाई ब्याज दरें, ईरान युद्ध और महंगाई ने बढ़ाई टेंशन

फेडरल रिजर्व का यह फैसला बताता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी एक नाजुक मोड़ पर है। एक तरफ युद्ध का साया है और दूसरी तरफ आसमान छूती तेल की कीमतें। जेरोम पॉवेल का बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले कुछ महीने आर्थिक मोर्चे पर काफी उतार-चढ़ाव वाले हो सकते हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अमेरिका के केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' ने अपनी ताजा बैठक में ब्याज दरों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। फेड रिजर्व ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है और इन्हें 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रखा है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अभी दरों में कटौती करना जल्दबाजी होगी। इस फैसले का सीधा असर न केवल अमेरिका पर, बल्कि भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजारों और अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिल रहा है।

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अमेरिका-ईरान तनाव और महंगाई का खतरा

फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने अपने संबोधन में सबसे ज्यादा चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों पर जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता की वजह से 'एनर्जी प्राइसेज' यानी कच्चे तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। जब भी ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर माल ढुलाई और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। फेड रिजर्व का मुख्य लक्ष्य महंगाई को काबू में रखना है, और मौजूदा हालात इस लक्ष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।

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