अमेरिका ने रूस की व्यापारिक घेराबंदी को और कड़ा करने के लिए नया कानून बनाया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (House of Representatives) ने 16 सितंबर, 2026 को हाउस ने लिंडसे ओ ग्राहम सैन्क्शनिंग रसिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) को 262-159 वोट से मंजूरी दी। अब यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा। ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाउगा।
अमेरिकी संसद ने दिया झटका
हाउस ने सीनेट से आए संशोधित बिल पर 262-159 वोट से सहमति दी। वोटिंग में 203 रिपब्लिकन और 58 डेमोक्रेट सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट किया, जबकि 7 रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट सांसदों ने विरोध किया। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया है। इससे पहले अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट (Senate) ने अगस्त में इसी कानून को 86-11 वोट से पास किया था। यह बिल रूस के अधिकारियों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा क्षेत्र पर नए प्रतिबंधों का रास्ता खोलता है। इसमें अमेरिकी प्रतिबंधों से रूस की बचने में मदद करने वाले नेटवर्क और शैडो फ्लीट (Shadow Fleet) पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके साथ ही Iran Sanctions Act को पांच साल के लिए आगे बढ़ाने की व्यवस्था है।
क्यों भारत के लिए चिंता की बात?
भारत के लिए इस बिल की सबसे बड़ी चिंता इसकी 100% तक अतिरिक्त टैरिफ (Tariff) लगाने की शक्ति है। कानून बनने के बाद ट्रंप उन देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगा सकते हैं, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ जाकर रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खरीदते हैं। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत के कुल क्रूड ऑयल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 52% थी। जून में यह 48.6% थी।
क्या भारत पर सीधे 100% टैरिफ लगेगा?
फिलहाल, यह विधेयक अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंच गया है। ट्रंप इसे कानून के तौर पर लागू कर सकते हैं। हालांकि, विधेयक का कानून के तौर पर लागू करते ही भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लागू नहीं हो जाएगा। बल्कि, राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने विवेक से इस अधिकार का इस्तेमाल करें। बिल पर चर्चा के दौरान कुछ सांसदों ने भारत समेत 10 देशों को नाम के साथ इसमें शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, सिंगापुर, स्लोवाकिया और UAE शामिल थे। लेकिन, रूल्स कमिटी में इस संशोधन को 3-7 वोट से आगे नहीं बढ़ सका।
भारत-अमेरिका ट्रेड टाक पर भी असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता (Trade Talks) चल रही हैं। अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट बना हुआ है। अगस्त 2026 में अमेरिका को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 21.8% बढ़कर 8.32 अरब डॉलर पहुंच गया, जो अगस्त 2025 में 6.83 अरब डॉलर था। ऐसे में अगर अमेरिका भारत से आने वाले कुछ सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो इसका असर द्विपक्षीय कारोबार पर पड़ सकता है। हालांकि, संभावित असर इस बात पर निर्भर करेगा कि राष्ट्रपति इस कानून का इस्तेमाल किस तरह करते हैं।
