अमेरिका और चीन के बीच शुल्क विवाद पर संवेदनशील वार्ता शनिवार को 10 घंटे तक चली, लेकिन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट और चीन के उपप्रधानमंत्री हे लाइफेंग के बीच जिनेवा में यह बैठक हुई थी। अब यह वार्ता रविवार को फिर से शुरू की जाएगी।
अमेरिका चीन व्यापार वार्ता 2025
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इस बातचीत का मकसद अमेरिका-चीन व्यापार तनाव को कम करके वैश्विक बाजारों को स्थिर करना है। हालांकि, वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने मीडिया से कोई बात नहीं की और गोपनीयता बनाए रखी।
व्यापार युद्ध के बीच दोनों पक्षों में शुल्क कटौती की संभावना
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर, उपप्रधानमंत्री हे लाइफेंग के नेतृत्व वाले चीनी प्रतिनिधिमंडल से स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में मिले। दोनों देशों के राजनयिकों ने भी इस बैठक की पुष्टि की।
विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता से भले ही कोई बड़ा समझौता न हो, लेकिन दोनों देश आयात शुल्क में कुछ कटौती पर सहमत हो सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और वित्तीय बाजारों को राहत मिल सकती है।
ट्रंप ने दिया शुल्क कम करने का संकेत, बाजार खोलने की अपील
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चीन पर लगने वाले आयात शुल्क को घटाकर 80% करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “चीन पर 80 प्रतिशत शुल्क सही रहेगा!” इसके साथ ही ट्रंप ने चीन से अमेरिकी वस्तुओं के लिए अपने बाजार खोलने का अनुरोध किया।
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगे आयात शुल्क के असर को लेकर चिंता बढ़ रही है। मौजूदा स्थिति में चीन से आने वाले उत्पादों पर अमेरिका 145% शुल्क वसूल रहा है, जबकि चीन ने अमेरिकी सामानों पर 125% शुल्क लगाया हुआ है।
शुल्क कटौती से वैश्विक कंपनियों को मिल सकती है राहत
अगर अमेरिका और चीन शुल्क कम करने पर सहमति जताते हैं, तो इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर बने तनाव में कुछ कमी आ सकती है। साथ ही उन कंपनियों को भी राहत मिलेगी जो अमेरिका-चीन व्यापार पर निर्भर हैं।
यह वार्ता ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशक स्थिरता की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
