म्यूचुअल फंड निवेशक हैं तो रिस्कोमीटर को समझना है जरूरी, नुकसान से बचेंगे, हमेशा रहेंगे फायदे में

Mutual Fund Riskometer: म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय रिटर्न तो अहम होता है, लेकिन उससे भी ज़रूरी है उस रिटर्न के लिए उठाया गया जोखिम। सेबी द्वारा शुरू किया गया रिस्कोमीटर निवेशकों को योजना के जोखिम स्तर की स्पष्ट जानकारी देता है, जिससे वे समझदारी से और अपने लक्ष्य अनुसार निर्णय ले सकें।

Mutual Fund Riskometer: जब म्यूचुअल फंड में निवेश की बात आती है, कितना रिटर्न मिलता है, इसकी ही चर्चा होती है। हालांकि जोखिम के बारे में जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आप यह सोचकर उस फंड को चुनते हैं कि उसमें रिटर्न अच्छा मिलेगा, लेकिन कभी-कभी खतरा भी होता है, यहीं पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा शुरू किया गया रिस्कोमीटर, निवेशकों को सूचित निर्णय लेने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रत्येक म्यूचुअल फंड योजना को आधिकारिक दस्तावेजों में अपना रिस्कोमीटर दिखाना अनिवार्य है, जिससे निवेशकों को योजना के जोखिम प्रोफाइल की स्पष्ट जानकारी मिलती है।

Mutual Fund Riskometer

सिर्फ रिटर्न नहीं, जोखिम भी समझें, यहां म्यूचुअल फंड रिस्कोमीटर की पूरी जानकारी (तस्वीर-istock)

म्यूचुअल फंड रिस्कोमीटर क्या है?

रिस्कोमीटर, म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा शुरू किया गया एक मानकीकृत जोखिम माप पैमाना है। रिस्कोमीटर एक उपकरण है जो प्रत्येक म्यूचुअल फंड स्कीम की फैक्टशीट और प्रचार सामग्री पर प्रदर्शित होता है। दूसरे शब्दों में रेगुलेटरी मानदंडों के अनुसार, सभी म्यूचुअल फंड योजनाओं को रिस्कोमीटर को पहले और स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होता है ताकि निवेशकों को उस विशेष फंड से जुड़े जोखिम का पता चल सके।

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