देश में टैक्स चोरी को रोकने और कर संग्रह को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आयकर विभाग (Income Tax Department) इस समय बेहद आक्रामक और एक्टिव मोड में नजर आ रहा है, जिसके तहत विशेष रूप से उच्च आय वर्ग (High Earners) और कॉर्पोरेट जगत के बड़े अधिकारियों की वित्तीय कुंडली खंगाली जा रही है। एबीपी लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स अधिकारियों ने अब उन सीनियर एग्जीक्यूटिव्स, प्रमोटर्स और उच्च वेतन पाने वाले पेशेवरों को अपने रडार पर ले लिया है जिनकी सालाना कमाई ₹50 लाख या उससे अधिक है, और उनके द्वारा दाखिल किए गए आईटीआर (ITR) और वास्तविक खर्चों के बीच आ रहे अंतर की बेहद बारीकी से जांच की जा रही है।
इनकम टैक्स विभाग हुआ एक्टिव, इन लोगों की खंगाल रहा कुंडली
रडार पर हैं ये लोग
आयकर विभाग द्वारा की जा रही इस सख्त कार्रवाई के पीछे का मुख्य कारण यह है कि कई बड़े अधिकारी और सैलरीड प्रोफेशनल्स अपनी कर देनदारी को कम करने के लिए विभिन्न प्रकार के भत्तों (Allowances), फर्जी रेंट रसीदों, या गलत निवेश दावों के जरिए अवैध रूप से टैक्स छूट का लाभ उठा रहे थे, जिस पर अब विभाग ने पूरी तरह से नकेल कसना शुरू कर दिया है। आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स टूल से लैस आयकर विभाग अब टैक्सपेयर्स के फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और उनके बैंक खातों, क्रेडिट कार्ड भुगतानों तथा महंगी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है, जिससे मामूली सी भी वित्तीय विसंगति या हेरफेर तुरंत पकड़ में आ रही है।
इस विशेष जांच अभियान के दायरे में वे सीनियर एग्जीक्यूटिव्स सबसे ऊपर हैं जिन्होंने अपने भारी-भरकम वेतन पैकेज को टैक्स-फ्री भत्तों में रीस्ट्रक्चर किया हुआ था, लेकिन वास्तव में उन खर्चों का कोई वैध प्रमाण या बिल मौजूद नहीं था। विभाग द्वारा ऐसे मामलों में धारा 148 या धारा 133(6) के तहत धड़ाधड़ नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिनमें टैक्सपेयर्स से उनके द्वारा क्लेम किए गए बड़े डिडक्शन (जैसे एचआरए या एलटीए) और विदेशों में जमा संपत्तियों या बैंक खातों का पूरा ब्योरा मांगा जा रहा है।
जानकारी छुपाने वालों पर इनकम टैक्स विभाग सख्त
इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति ने अपनी घोषित आय से अधिक मूल्य के शेयर खरीदे हैं, महंगे अंतरराष्ट्रीय दौरों पर भारी खर्च किया है, या आलीशान लग्जरी गाड़ियां और रियल एस्टेट में निवेश किया है, तो विभाग उनसे धन के स्रोत (Source of Funds) का स्पष्टीकरण मांग रहा है। यदि कोई टैक्सपेयर विभाग के इन नोटिसों का संतोषजनक और कानूनी रूप से वैध जवाब देने में विफल रहता है, तो उसे न केवल बकाया टैक्स पर भारी ब्याज चुकाना पड़ सकता है, बल्कि टैक्स चोरी की गई राशि पर 200 प्रतिशत तक की भारी पेनाल्टी (जुर्माना) भी लगाई जा सकती है और गंभीर मामलों में कानूनी मुकदमों का भी सामना करना पड़ सकता है।
