हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और उसके बाद निवेशकों का भरोसा टूटा। लेकिन अब अडानी ग्रुप ने कहा कि निवेशकों के हितों की चिंता उनके लिए सर्वोपरि है। ग्रुप के पास कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त रकम है लिहाजा किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि इस तरह की जानकारी सामने आ रही है कि अडानी ग्रुप अब विस्तार की जगह अपने सभी फर्मों को और मजबूती देने की कोशिश में जुट गया है।
गौतम अडानी
कंपनी का वित्तीय लेखाजोखा मजबूत
अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा कि शेयरों में गिरावट अस्थाई है। कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होने के साथ साथ हम ग्रोथ की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सीएफओ जुगशिंदर सिंह के मुताबिक ग्रुप का वित्तीय अनुशासन समेत दूसरे उपायों पर जोर है। बाजार से स्थिर होने के साथ ही पूंजी बाजार रणनीति की समीक्षा करेंगे। हमारा फोकस उस तरह के कारोबार पर है जो निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने में सक्षम हों।
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट बेबुनियाद
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को अडानी एंटरप्राइजेज ने झूठ से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया था। लेकिन निवेशकों के भरोसे पर असर पड़ा है। अगर समूह की मार्केट वैल्यू की बात करें तो 125 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है। अडानी समूह पर सितंबर 2022 के अंत तक करीब 2.26 लाख करोड़ का कर्ज था जबकि नकदी करीब 31 हजार करोड़ के करीब थी। ग्रुप का कहना है कि हमारा इतिहास पिछले 25 वर्षों से अनुशासित तरीके से पूंजी लगाने का रहा है।
