मृतकों के बैंक खातों का विवरण वारिसों को क्यों न मुहैया कराया जाए? सुप्रीम कोर्ट का RBI से बड़ा सवाल

पीठ ने कहा, "यदि कोई व्यक्ति अपने कई बैंक खातों का विवरण छोड़े बगैर मर जाता है, तो उसके वारिस उनमें जमा राशि के बारे में जानकारी कैसे जुटाएंगे? कानूनी वारिसों को जानकारी देने में क्या समस्या है? सरकार को इस पर नीति बनानी होगी।"

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से एक अहम सवाल पूछा। कोर्ट ने जानना चाहा कि जब किसी खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके बैंक खाते की जानकारी उसके सही (वैध) उत्तराधिकारियों को देने में आखिर दिक्कत क्या है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में अभी स्पष्ट नियम या नीति नहीं है, जिसकी वजह से लोगों को परेशानी होती है। इसलिए जरूरी है कि एक साफ और आसान नीति बनाई जाए, ताकि मृत व्यक्ति के परिवार या वारिसों को बिना परेशानी के बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मिल सके।

Supreme Court

शीर्ष अदालत ने केंद्र और आरबीआई को इस मामले में नए हलफनामे दाखिल करने को कहा। (फोटो क्रेडिट-iStock)

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पत्रकार सुचेता दलाल की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस याचिका में मृत खाताधारकों के निष्क्रिय पड़े हुए जमा की जानकारी उनके उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने के लिए एक व्यवस्था बनाने का निर्देश देने की अपील की गई है।

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