दुनिया का एक कड़वा सच यह है कि इंसान की मृत्यु के बाद उसके सारे सांसारिक रिश्ते और जिम्मेदारियां खत्म हो जाती हैं, लेकिन आयकर विभाग (Income Tax Department) के नियम कुछ अलग ही कहानी कहते हैं। भारत के टैक्स कानूनों के मुताबिक, किसी टैक्सपेयर (करदाता) के निधन के बाद भी उसकी इनकम टैक्स लायबिलिटी पूरी तरह खत्म नहीं होती है। अगर दिवंगत व्यक्ति की मौत वाले वित्तीय वर्ष (Financial Year) में कोई कमाई हुई थी, या उसका पिछला कोई टैक्स बकाया था, तो सरकार को उसका टैक्स चाहिए होता है। अब सवाल उठता है कि जब टैक्सपेयर ही नहीं रहा, तो फिर उसका इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) कौन फाइल करेगा और टैक्स के पैसे कहां से आएंगे? आइए इस पूरे नियम को समझते हैं।
कौन भरता है दिवंगत व्यक्ति का टैक्स?
आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के नियमों के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके टैक्स से जुड़े सभी कामों को पूरा करने की जिम्मेदारी उसके 'लीगल हेयर' (Legal Heir) यानी कानूनी वारिस की होती है। कानूनी वारिस आमतौर पर दिवंगत व्यक्ति का जीवनसाथी (पति/पत्नी), बच्चे या वह व्यक्ति होता है जिसे उसकी वसीयत (Will) में संपत्ति का हकदार बनाया गया हो। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उसकी कोई इनकम थी, तो उसके कानूनी वारिस को आयकर विभाग की नजर में 'डीम्ड असेसी' (Deemed Assessee) माना जाता है। इसका मतलब है कि अब उस दिवंगत व्यक्ति की जगह कानूनी वारिस ही सरकार के प्रति जवाबदेह होगा।
कैसे शुरू होती है इसकी प्रक्रिया?
मृतक व्यक्ति का टैक्स भरने या पुराना रिफंड क्लेम करने के लिए कानूनी वारिस को सबसे पहले इनकम टैक्स विभाग की ऑफिशियल ई-फाइलिंग वेबसाइट पर खुद को 'लीगल हेयर' के रूप में रजिस्टर करना होता है। इसके लिए कुछ बेहद जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जैसे—मृतक व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate), उनका पैन कार्ड (PAN Card), कानूनी वारिस का खुद का पैन कार्ड और एक लीगल हेयर सर्टिफिकेट (जो कोर्ट, स्थानीय राजस्व अधिकारी या निगम द्वारा जारी किया गया हो)। इन दस्तावेजों को पोर्टल पर अपलोड करने के बाद जब आयकर विभाग इसे मंजूरी (Approval) दे देता है, तब जाकर वारिस को मृतक की तरफ से रिटर्न दाखिल करने का अधिकार मिलता है।
क्या कानूनी वारिस को अपनी जेब से भरना होगा टैक्स?
टैक्स के नाम से अक्सर लोग डर जाते हैं कि क्या उन्हें अपने माता-पिता या पार्टनर की मौत के बाद अपनी खुद की कमाई से टैक्स चुकाना होगा? तो इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। कानूनन, किसी भी वारिस को अपनी व्यक्तिगत जेब या अपनी कमाई से मृतक का टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं होती है।
पैसे कहां से कटेंगे?
टैक्स की वसूली केवल मृतक व्यक्ति की छोड़ी गई संपत्ति, बैंक बैलेंस, बिजनेस या निवेश (जैसे एफडी, शेयर्स) से ही की जा सकती है। मान लीजिए मृतक की संपत्ति से ₹5 लाख की वैल्यू मिली है और उनका टैक्स बकाया ₹2 लाख है, तो वह ₹2 लाख इसी संपत्ति में से चुकाया जाएगा। लेकिन, अगर मृतक अपने पीछे कोई संपत्ति या पैसा छोड़कर नहीं गया है, तो कानूनी वारिस को अपनी जेब से ₹1 भी टैक्स देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। लायबिलिटी हमेशा मृतक की संपत्ति की वैल्यू तक ही सीमित होती है।
रिटर्न दाखिल करना क्यों है बेहद जरूरी?
कई बार लोग सोचते हैं कि व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, तो अब विभाग को क्या ही पता चलेगा। लेकिन ऐसा सोचना बड़ी मुसीबत को न्योता देना है। अगर आप मृतक की संपत्ति (जैसे घर या बैंक अकाउंट) को अपने नाम पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं, तो उनका टैक्स क्लियर होना जरूरी है। इसके अलावा, अगर मृतक का कोई टैक्स रिफंड (Refund) सरकार के पास अटका हुआ है, तो वह रिफंड भी आपको तभी मिलेगा जब आप उनका आखिरी ITR दाखिल करेंगे। एक बार जब पिछले सारे टैक्स के काम और असेसमेंट पूरे हो जाते हैं, तभी कानूनी वारिस को मृतक के पैन कार्ड को हमेशा के लिए सरेंडर (Deactivate) करने की अनुमति मिलती है। इसलिए, दुख की घड़ी से उबरने के बाद इस कानूनी जिम्मेदारी को समय पर पूरा कर लेना ही समझदारी है।
