Tax On Diwali Bonus: दिवाली के फेस्टिव सीजन के बीच कई एम्प्लॉयर अपने कर्मचारियों को बोनस देते हैं। गिफ्ट या उपहार देने की यह परंपरा न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाती है बल्कि कंपनी में वर्किंग कल्चर को भी बेहतर बनाती है। इस तरह के बोनस में कैश, गिफ्ट कार्ड, खुद की कंपनी के प्रोडक्ट, वाउचर या प्रीपेड कार्ड जैसी चीजें शामिल होती हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इस तरह के रिवार्ड पर टैक्स लग सकता है? आगे जानिए क्या हैं इससे जुड़ा नियम।
बोनस पर टैक्स का नियम
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क्या है टैक्स से जुड़े नियम
आयकर नियमों के अनुसार कर्मचारी या परिवार के सदस्य को एम्प्लॉयर से प्राप्त कोई गिफ्ट, वाउचर या टोकन टैक्सेबल होता है। मगर यदि इन गिफ्ट्स की कुल वैल्यू एक वित्तीय वर्ष के दौरान 4,999 रुपये तक रहती है, तो वो टैक्स फ्री रहती है।
4999 रुपये की छूट लिमिट एक साल में होती है और साल के दौरान जन्मदिन, विवाह, वर्षगांठ, अन्य त्यौहार आदि जैसे सभी अवसरों पर दिए गए उपहारों को शामिल करती है।
4,999 रुपये से अधिक पर लगेगा टैक्स
4,999 रुपये से अधिक कीमत के उपहार टैक्सेबल होंगे। 4,999 रुपये की छूट आम तौर पर तब प्रासंगिक होती है जब गिफ्ट किसी अवसर पर सभी कर्मचारियों को वितरित किए जाते हैं। ध्यान रहे कि इस 4999 रु कर टैक्स छूट नकद को छोड़कर सभी तरह के गिफ्ट्स पर लागू होती है। इसमें ई-वाउचर, उपहार कार्ड, प्रीपेड कार्ड आदि शामिल हैं।
1 रु पर भी लगेगा टैक्स
इसके अलावा गिफ्ट के रूप में दिया गया कैश कर्मचारी के रेगुलर सैलरी के रूप में टैक्सेबल होगी। दिवाली गिफ्ट के रूप में कैश में प्राप्त 1 रुपया भी कर्मचारी के हाथों में टैक्सेबल होगा। कंपनी से दिवाली गिफ्ट के रूप में मिले कैश पर कोई टैक्स छूट उपलब्ध नहीं है।
