टाटा समूह अर्थव्यवस्था के लिए अहम, बातचीत के जरिये सुलझाएं मतभेद : वित्त मंत्री

टाटा समूह में पिछले कुछ महीनों से मतभेद चल रहे हैं। यह विवाद 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड की बैठक में खुलकर सामने आया था। एक तरफ एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व वाला टाटा संस का बोर्ड था, तो दूसरी तरफ नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट था। टाटा ट्रस्ट, टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच चल रहे विवाद को जल्द से जल्द बातचीत के जरिए सुलझाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। इसलिए दोनों पक्षों को आपसी सहमति से इस विवाद का समाधान निकालना चाहिए। सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान सीतारमण ने कहा कि टाटा समूह का विवाद सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहिए था। समूह के नेतृत्व से उम्मीद की जाती है कि वे समझदारी और आपसी बातचीत से इस मामले को जल्द सुलझाएंगे।

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वित्त मंत्री ने टाटा ग्रुप के मामले को संवेदनशील बताया।

उन्होंने कहा कि इस विवाद को खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बेहतर तालमेल और व्यावसायिक समझ जरूरी है। हालांकि, वित्त मंत्री ने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या सरकार दोनों पक्षों को बातचीत के लिए एक साथ लाने की कोशिश करेगी। उन्होंने इस मामले को संवेदनशील बताया।

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