भारतीय मिडिल क्लास फेमिली में कर्ज लेना आज भी सही नहीं माना जाता है। बदलते दौर में जरूरत बैंक लोन की स्वीकार्यता बढ़ी है लेकिन आज भी गांव में कर्ज से लोग दूर रहना पसंद करते हैं। वहीं, अमीर लोगों में कर्ज को लेकर बिल्कुल अलग अवधारणा है। अमीर लोग कर्ज को लेकर अपने बिजनेस को विस्तार करते हैं और मोटा पैसा कमाते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि Loan लेना हमेशा बुरा क्यों नहीं होता है? साथ ही अमीर लोग कर्ज का इस्तेमाल कैसे करते हैं?
लोन का बोझ
लोग डरते हैं, कारोबारी कमाते हैं
बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि आम जनता डर या जानकारी की कमी के कारण कर्ज लेने से बचती हैं। वहीं बिजनेमैन लंबे समय से अपने बिजनेस को बढ़ाने और नए मार्केट में जगह बनाने के लिए सही तरीके से प्लान किए गए कर्ज लेते हैं। बिजनेमैन का मानना है कि बिजनेस की ग्रोथ के हिसाब से सही तरह से लिया गया कर्ज सफलता का एक बड़ा कारण बन सकता है।
अमीरों का असली फॉर्मूला क्या है?
अमीर कारोबारियों के लिए कर्ज एक 'लेवरेज' (Leverage) है। वे कर्ज का इस्तेमाल अपने निजी शौक पूरे करने के लिए नहीं, बल्कि 'रिटर्न ऑन कैपिटल' कमाने के लिए करते हैं। अमीर लोग बैंक से अगर 10% के ब्याज पर लोन लेते हैं तो उसे अपने बिजनेस में लगाकर 25% का रिटर्न कमाते हैं। अमीर लोग कभी भी बैंक के पैसे से डरते नहीं, बल्कि सही समय, सही दिशा और पक्के रिपेमेंट प्लान के साथ उस पैसे को अपनी ग्रोथ का 'रॉकेट फ्यूल' बना लेते हैं।
गुड और बैड कर्ज के बीच अंतर समझें
जानकारों का कहना है कि कर्ज को बोझ नहीं, बल्कि एक साधन (leverage) के तौर पर देखना। सरल भाषा में कहें तो ऐसा कर्ज जो भविष्य में आपकी आय, संपत्ति या वित्तीय क्षमता बढ़ाने में मदद करे, उसे गुड डेट कहा जा सकता है। इसके उलट ऐसा कर्ज जो सिर्फ मौजूदा खर्च या दिखावे के लिए लिया जाए और जिसके बदले कोई संपत्ति या आय पैदा न हो, वह खराब कर्ज होता है।
इससे यह सीख मिलती है कि आम लोग कर्ज लेकर अपना शौक पूरा करते हैं। वहीं, अमीर लोग कर्ज लेकर अपने बिजनेस को विस्तार कर और अमीर बन जाते हैं।
