SIP vs Market Crash and Recovery : अक्सर शेयर बाजार में तेज गिरावट आते ही निवेशकों SIP में निवेश रोक देते हैं। अगर आप भी SIP के जरिये निवेश करते हैं और मार्केट क्रैश के दौरान आपके मन में भी ये ख्याल आता है, कि बाजार गिरते ही निवेश रोक दें, तो बाजार का इतिहास जरूर जानिए। क्योंकि पिछले दो दशकों के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा कमाई के मौके अक्सर उसी समय आए, जब ज्यादातर लोग डरकर बाजार से बाहर निकल रहे थे।
बाजार में गिरावट के समय घटाएं नहीं बढ़ाएं निवेश
24 घंटे में बदल गई तस्वीर
इसी सप्ताह में शेयर बाजार ने यह सबक दोहराया है। बुधवार को अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद सेंसेक्स 1,677 अंक और निफ्टी 516 अंक से ज्यादा टूट गया। कई निवेशक घबरा गए और बाजार में आगे बड़ी गिरावट की आशंका जताने लगे। लेकिन अगले ही दिन तस्वीर पूरी तरह बदल गई। गुरुवार को बाजार मजबूत बढ़त के साथ खुला। सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा और निफ्टी 150 अंक से ज्यादा चढ़ गया। सिर्फ 24 घंटे में निवेशकों का मूड बदल गया। यही शेयर बाजार की सबसे बड़ी सच्चाई है। गिरावट और रिकवरी अक्सर बहुत कम अंतराल में आती हैं।
क्यों SIP रोकना भारी पड़ सकता है?
FundsIndia की Wealth Conversations Report (जून 2026) के मुताबिक, जनवरी 2005 से मई 2026 के बीच शेयर बाजार के 30 सबसे बड़े एक-दिवसीय रिटर्न में से 29 दिन ऐसे थे, जो बड़े क्रैश के दौरान या उसके तुरंत बाद आए। यानी अगर कोई निवेशक घबराकर बाजार से बाहर निकल गया, तो उसके सबसे तेज रिकवरी वाले दिनों से चूकने की संभावना भी सबसे ज्यादा रही।
सबसे बड़ी गिरावट के बाद सबसे बड़ी तेजी
रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी के दौरान बाजार करीब 60% तक गिरा था। लेकिन इसी दौर में 30 में से 22 सबसे बेहतरीन कारोबारी दिन भी आए। कोविड-19 महामारी के दौरान करीब 40% की गिरावट के बीच भी 4 सबसे बड़े रिटर्न दर्ज हुए। 7 अप्रैल, 2020 को बाजार एक ही दिन में 8.8% उछल गया था।
| ऐतिहासिक मार्केट क्रैश इवेंट | बाजार की अधिकतम गिरावट (% में) | क्रैश के दौरान रिकवरी का रिकॉर्ड |
| 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी | ~60% गिरावट | इसी मंदी के दौर में बाजार के इतिहास के 30 में से 22 सबसे बेहतरीन कारोबारी दिन दर्ज हुए। |
| 2020 की कोविड-19 महामारी | ~40% गिरावट | इस तेज गिरावट के बीच 4 सबसे बड़े सिंगल-डे रिटर्न आए। 7 अप्रैल 2020 को बाजार एक ही दिन में 8.8% उछल गया था। |
गिरावट में SIP का असली फायदा
बाजार गिरने पर SIP का सबसे बड़ा फायदा सामने आता है। हर महीने तय रकम निवेश होने की वजह से गिरावट के दौरान उसी पैसे में ज्यादा यूनिट खरीदी जाती हैं। जब बाजार दोबारा ऊपर जाता है, तो यही अतिरिक्त यूनिट कुल रिटर्न को बेहतर बनाती हैं। निवेश की दुनिया में इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है। यही कारण है कि अनुभवी निवेशक बाजार की हर गिरावट को नुकसान नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए निवेश का अवसर भी मानते हैं।
सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
बाजार में सही समय पर बाहर निकलना और फिर सही समय पर दोबारा प्रवेश करना बेहद मुश्किल होता है। इतिहास बताता है कि बाजार के सबसे खराब दिन और सबसे अच्छे दिन अक्सर एक-दूसरे के बेहद करीब होते हैं। ऐसे में घबराकर SIP रोकने या निवेश निकालने वाले निवेशक कई बार उसी तेज रिकवरी से चूक जाते हैं, जो लंबे समय की कमाई का बड़ा हिस्सा बनती है। यही वजह है कि बाजार का इतिहास एक ही बात कहता है कि अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है, तो हर गिरावट पर घबराने के बजाय अनुशासन बनाए रखना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।
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