Share Market Down: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से तेल आयात पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर कुछ खास नहीं दिखाई दिया। गुरुवार को बाजार की प्री ओपनिंग में बाजार में हलकी गिरावट देखने को मिली थी जो खुलने के बाद भी जारी रही, दोपहर डेढ़ बजे के करीब बाजार में गिरावट तेजी से बढ़ी और सेंसेक्स दिन के निचले स्तर पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा कीमतों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने बाजार की सांसें फुला दी हैं। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 80000 के नीचे फिसल गया है. सेंसेक्स ने 79,979.05 का निचला स्तर छुआ।
Share Market Down (Pic Credit: iStock)
गुरुवार, 7 अगस्त 2025 को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। बाजार की इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाना है, जिससे कुल टैरिफ अब 50 प्रतिशत हो गया है। आइए जानते हैं किन 3 वजहों से बाजार में हाहाकार मच गया।
सेंसेक्स में गिरावट
सेंसेक्स की 30 में से 26 कंपनियों के शेयर लाल निशान में यानी गिरावट के साथ खुले, जबकि सिर्फ 4 कंपनियों के शेयर ही बढ़त के साथ हरे निशान में दिखे। इसी तरह, निफ्टी की 50 में से 40 कंपनियों के शेयरों में नुकसान दर्ज किया गया, और केवल 10 कंपनियों के शेयरों ने बढ़त दिखाई।
शेयरों की बात करें तो मारुति सुजुकी के शेयरों में सबसे ज्यादा 0.36 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में सबसे अधिक 1.21 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। ट्रंप के फैसले से बाजार में घबराहट दिख रही है और निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं।
निवेशकों के 1 लाख करोड़ स्वाहा
मार्केट में गिरावट के बीच बीएसई सेंसेक्स में लिस्ट कंपनियों का मार्केट कैप 4 लाख करोड़ रुपये घट गया। ट्रंप ने भारत पर पहले ही 25 फीसदी टैरिफ लगाया था। बुधवार को उन्होंने 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया। इससे भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है।
3 कारणों से टूटा बाजार
1. ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से भारत को झटकाअमेरिका ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क (टैरिफ) को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। आधिकारिक तौर पर इसकी वजह भारत द्वारा रूस से तेल आयात बताई गई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कदम अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। इस फैसले से भारत के कुछ खास सेक्टरों पर असर पड़ सकता है।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
बुधवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार से करीब ₹5,000 करोड़ की निकासी की। लगातार FII की बिकवाली से बाजार में अस्थिरता (वोलैटिलिटी) बढ़ गई है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव दिख रहा है।
3. क्रूड ऑयल की कीमतें चढ़ीं, महंगाई का डर बढ़ा
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 1% की तेजी आई और यह $87.56 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका है, जो निवेशकों की चिंता को और गहरा करता है
(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना देने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है और इसे किसी प्रकार की निवेश सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल अपने पाठकों/दर्शकों को सलाह देता है कि किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)
