मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) गहराने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल का सीधा असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। बाजार खुलते ही दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में आ गए। शुरुआती कारोबार में ही बीएसई (BSE) का सेंसेक्स 338 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 78,616 के स्तर पर आ गया। वहीं, दूसरी ओर एनएसई (NSE) का निफ्टी 50 भी दबाव का सामना करते हुए 24,592 के करीब कारोबार करता नजर आया।
कच्चे तेल में उबाल से पस्त हुआ शेयर बाजार
बाजार में क्यों आई गिरावट?
बाजार में आई इस गिरावट की सबसे मुख्य वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार दर्ज की जा रही तेजी है। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 1.2 प्रतिशत चढ़कर $83.48 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही पर रोक और तनाव बढ़ने की आशंकाओं ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से देश में महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा रहता है।
हालांकि, शेयर बाजार में इस गिरावट के बीच एक राहत भरी खबर यह भी है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार में अपना भरोसा बनाए हुए हैं। FIIs की तरफ से घरेलू शेयर बाजार में लगातार खरीदारी देखने को मिल रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की इस खरीदारी से शेयर बाजार को निचले स्तरों पर सहारा मिल सकता है और आने वाले दिनों में स्थिरता देखने को मिल सकती है।
