Gold ETF और फिजिकल गोल्ड में अटके हैं? NSE EGR को समझ लें, दोनों हाथ में लड्डू से कम नहीं

Golf ETF और फिजिकल गोल्ड अब भी आपके पसंदीदा निवेश विकल्प हैं, जो आपका NSE EGR को जरूर समझना चाहिए, क्योंकि यह आपको दोनों के फायदे एक साथ देता है। इसके साथ ही सुरक्षा और सुविधा भी मिलती है।

Gold ETF vs Physical Gold vs NSE EGR : सोना सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रहा। अब निवेशक Gold ETF, डिजिटल गोल्ड और फिजिकल गोल्ड के बीच चुनाव कर रहे हैं। इसी बीच NSE ने Electronic Gold Receipt यानी EGR ट्रेडिंग शुरू कर दी है। यह ऐसा मॉडल है जिसमें ETF जैसी ट्रेडिंग और फिजिकल गोल्ड जैसी डिलीवरी दोनों का फायदा मिल सकता है।

GOLD ETF EGR

गोल्ड ईटीएफ की तरह ईजीआर भी डिजिटल

आखिर क्या है EGR?

EGR यानी इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट एक डिजिटल सर्टिफिकेट है, जो असली सोने के बदले जारी किया जाता है। यह सोना SEBI रेगुलेटेड वॉल्ट में रखा जाता है और उसका इलेक्ट्रॉनिक रिसीट निवेशक के डिमैट अकाउंट में दिखाई देता है। ठीक वैसे ही जैसे शेयर या ETF होल्डिंग दिखती है। इसमें 100 मिलीग्राम से लेकर 1 किलो तक के यूनिट उपलब्ध हैं। यानी छोटे निवेशक भी इसमें एंट्री ले सकते हैं।

End of Feed