अक्सर आपने देखा होगा लोग प्रॉपर्टी या प्लॉट लेकर उसे छोड़ देते हैं। प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए अक्सर लोग प्लॉट लेकर उसे ऐसे ही छोड़ देते हैं फिर जरुरत पड़ने पर या तो उसे बेचते हैं या फिर उसपर घर बना लेते हैं। अगर नोएडा में आपका भी कोई प्लॉट कई सालों से पड़ा है तो ये आपके काम की खबर साबित हो सकती है। दरअसल, कई साल पुराने पड़े प्लॉट मालिकों को अथॉरिटी की तरफ से तगड़ा झटका मिला है।
इतने साल में नहीं बनाया मकान तो हाथ से जाएगी जमीन
अथॉरिटी के नए एक्शन के तहत नोएडा में प्लॉट खरीदकर उनके दाम बढ़ाने का खेल अब खत्म होगा। इसे लेकर नोएडा अथॉरिटी ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अथॉरिटी ने उन आवासीय भूखंडों (प्लॉट) के आवंटन रद्द करने की मंजूरी दी है जो 12 साल से ज्यादा समय से खाली पड़े हैं। यह कदम प्लॉट को सट्टेबाजी के लिए खाली रखने के बजाय आवास के उद्देश्य से इस्तेमाल करने के लिए उठाया गया है। यानी आप प्लॉट को खाली छोड़ने के बजाए उसपर घर बनाएं।
नोएडा अथॉरिटी के इस फैसले से उन प्लॉट मालिकों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने काफी लंबे समय से अपने प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन नहीं कराया है। हालांकि, जिन्होंने प्लॉट पर पहले से काम करा लिया है उन्हें यहां मकान बनाने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
छिन जाएगा प्लॉट
नोएडा अथॉरिटी की 219वीं बोर्ड बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर दीपक कुमार ने की। इस बैठक में नए नियमों के साथ-साथ विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। सबसे बड़ा निर्णय यह लिया गया कि जो आवंटियों ने 12 साल के भीतर अपने प्लॉट पर मकान नहीं बनाया है, उनका स्वामित्व अधिकार रद्द कर दिया जाएगा। जिनके निर्माण कार्य पहले से चल रहे हैं, उन्हें पूरा करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा।
नोएडा अथॉरिटी के सीईओ के मुताबिक खाली पड़े प्लॉट न केवल पड़ोस की सुंदरता को प्रभावित करते हैं बल्कि नियमों का उल्लंघन भी होते हैं। वर्तमान में 17 ऐसे आवासीय भूखंड हैं, जिनमें अभी तक कोई निर्माण नहीं हुआ या कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला। इनमें से नौ भूखंडों पर कोई काम ही शुरू नहीं हुआ है। पिछले एक साल में अथॉरिटी लगातार चेतावनी दे रही है।
कितने प्लॉट्स खाली?
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30,000 प्लॉट आवंटित किए गए हैं, जिनमें से करीब 1,500 प्लॉट पर आंशिक निर्माण हुआ है। कई मालिक इस नियम की खामी का फायदा उठाकर प्लॉट को मकान बनाने के बजाय निवेश या सट्टेबाजी के लिए रखते हैं। अथॉरिटी का कहना है कि खाली प्लॉट शहर की बढ़ती आवासीय मांग को पूरा करने में बाधा डालते हैं, इसलिए अब यह सख्त कदम उठाया गया है।
ये भी लिया गया फैसला
बैठक में अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। डिफॉल्टर डेवलपर्स के लिए ब्याज छूट बंद करने का फैसला किया गया और यूनिफाइड रेगुलेशंस - 2025 को लागू किया गया, जिससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आवंटन नियम, स्वीकृतियां और भुगतान एक जैसे होंगे। इसके तहत नए प्लॉट आवंटन में स्कूल और कॉलेजों के लिए भी मंजूरी दी जाएगी।
इसके अलावा, कई विकास परियोजनाओं को भी हरी झंडी मिली। इनमें सेक्टर 145 में 300 टन प्रतिदिन क्षमता वाला ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के लिए 86.67 करोड़ रुपये, यमुना और हिंडन नदियों की नालियों की सफाई और नए पुलिस स्टेशन के लिए 4,000 वर्ग मीटर भूखंड शामिल हैं। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब इन परियोजनाओं की प्रगति मोबाइल ऐप के जरिए ट्रैक की जा सकेगी।
