भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शुक्रवार को एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसका उद्देश्य केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों (KRA) के रजिस्ट्रेशन को वापस लेने की प्रक्रिया को अधिक आसान और व्यवस्थित बनाना है। यह कदम खासतौर पर निवेशकों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
सेबी ने केवाईसी पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित बनाया (तस्वीर-istock)
रजिस्ट्रेशन छोड़ने की प्रक्रिया होगी सरल
सेबी ने सर्कुलर में स्पष्ट किया कि यह नियम इसलिए जरूरी है ताकि अगर कोई केआरए अपने व्यावसायिक निर्णय के कारण रजिस्ट्रेशन छोड़ना चाहे या वित्तीय कठिनाइयों या नियामकीय कारणों से ऐसा करने के लिए मजबूर हो, तो उस स्थिति को सुव्यवस्थित ढंग से संभाला जा सके।
सेवाओं को व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा बंद
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक सेबी ने कहा कि यह सुनिश्चित किया गया है कि केआरए द्वारा रजिस्ट्रेशन वापस लेने की प्रक्रिया, चाहे वह स्वेच्छा से हो या अनिवार्य रूप से, एक सुव्यवस्थित और आसान ढंग से की जाए, ताकि उनकी जरूरी सेवाएं सुचारू रूप से बंद हो सकें।
KYC रिकॉर्ड के हस्तांतरण की व्यवस्था
नए नियामकीय ढांचे के अनुसार, केआरए को अपने निवेशकों के केवाईसी रिकॉर्ड इस प्रकार संरक्षित रखने होंगे कि उन्हें अन्य सेबी-रजिस्टर्ड केआरए के साथ आसानी से साझा और स्थानांतरित किया जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि निवेशकों को दोबारा केवाईसी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
SOP बनाना होगा अनिवार्य
सेबी ने सर्कुलर में यह भी अनिवार्य किया है कि प्रत्येक केआरए के पास, रजिस्ट्रेशन समाप्ति की स्थिति से निपटने के लिए, अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure - SOP) होनी चाहिए।
SOP में क्या होगा शामिल?
SOP में निम्नलिखित बिंदुओं को स्पष्ट रूप से शामिल करना आवश्यक होगा। रिकॉर्ड, आंकड़े और दस्तावेजों के सुरक्षित स्थानांतरण की प्रक्रिया, अनुबंधों के निपटान के स्पष्ट नियम, निवेशकों के डेटा की सुरक्षा हेतु सख्त दिशा-निर्देश।
SEBI का यह कदम केआरए उद्योग को अधिक पारदर्शी और निवेशक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे न केवल एजेंसियों को रजिस्ट्रेशन छोड़ने की प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि निवेशकों की सुविधा और डेटा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
