SME IPO: मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने मंगलवार को एसएमई (स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) IPO के लिए आवेदन को लेकर कम से कम निवेश सीमा चार लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि केवल पर्याप्त जोखिम लेने और निवेश की क्षमता वाले निवेशक ही आवेदन कर सकें। यह कदम एसएमई इश्यू में तेज ग्रोथ के बाद उठाया गया है। इन इश्यू में निवेशकों की अच्छी-खासी भागीदारी रही है।
एसएमई आईपीओ में न्यूनतम निवेश सीमा
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निवेशकों की भागीदारी भी काफी बढ़ी
एसएमई इश्यू में वृद्धि के साथ, ऐसी ऑफरिंग्स में निवेशकों की भागीदारी भी काफी बढ़ गई है। अलॉटेड निवेशक-आवेदक रेशियो वित्त वर्ष 2021-22 में चार गुना था, यह वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़कर 46 गुना और वित्त वर्ष 2023-24 में 245 गुना हो गया है। यानी पहले 4 में से एक व्यक्ति को एसएमई आईपीओ में शेयर मिल जाते थे, मगर अब 245 में से एक को मिलते हैं।
छोटे रिटेल निवेशकों की रक्षा
सेबी ने अपने कंसल्टेशन पेपर में कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में एसएमई आईपीओ में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। एसएमई आईपीओ में जोखिम ज्यादा है और लिस्टिंग के बाद धारणा बदलती है तो उनके फंसने का खतरा होता है। इसको देखते हुए, छोटे रिटेल निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए एसएमई आईपीओ में न्यूनतम आवेदन का आकार एक लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।’’
इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल जोखिम लेने की क्षमता और जानकारी रखने वाले निवेशक ही एसएमई आईपीओ में आवेदन करें।
एसएमई सेगमेंट को लेकर भरोसा बढ़ेगा
उच्च निवेश सीमा छोटे निवेशकों की भागीदारी को कम करेगी और जोखिम लेने की क्षमता वाले निवेशकों को आकर्षित करेगी। इससे एसएमई सेगमेंट को लेकर भरोसा बढ़ेगा। एक अन्य प्रस्ताव में निवेश सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर चार लाख रुपये प्रति आवेदन करने का सुझाव दिया गया है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस बारे में लोगों से चार दिसंबर तक सुझाव देने को कहा है। (इनपुट - भाषा)
