Securities Transfer Rules: बाजार नियामक SEBI ने निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव का मकसद यह है कि अगर किसी निवेशक की मृत्यु हो जाती है तो उसके वारिसों या नामांकित व्यक्ति को उसकी प्रतिभूतियां (जैसे शेयर या अन्य निवेश) आसानी से मिल सकें। इसके लिए सेबी ने प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल बनाने का सुझाव दिया है। इस पहल से निवेशकों के परिवारों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और लंबी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।
निवेशक की मौत के बाद वारिसों को संपत्ति हस्तांतरण आसान बनाने की तैयारी, सेबी का नया प्रस्ताव (तस्वीर-istock)
दावों के निपटान की प्रक्रिया होगी आसान
न्यूज एजेेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सेबी द्वारा जारी परामर्श पत्र के अनुसार, नियामक ने दस्तावेजीकरण से जुड़ी मौद्रिक सीमाओं में बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही छोटे दावों के मामलों में ‘सीधा और निर्बाध प्रसंस्करण’ यानी एसटीपी (Straight Through Processing) व्यवस्था शुरू करने की भी बात कही गई है। इस व्यवस्था के तहत कम राशि वाले दावों को जल्दी और बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया के निपटाया जा सकेगा। इसका उद्देश्य दावों के निपटान में लगने वाला समय कम करना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
पुरानी सीमाओं की समीक्षा जरूरी
SEBI का कहना है कि सरलीकृत दस्तावेजीकरण के लिए जो मौजूदा मौद्रिक सीमाएं तय की गई थीं, वे काफी पहले निर्धारित की गई थीं। उस समय से अब तक प्रतिभूति बाजार में काफी विस्तार हो चुका है और निवेश की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में पुरानी सीमाएं अब मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए सेबी ने इन सीमाओं की समीक्षा करने और उन्हें बढ़ाने की आवश्यकता जताई है, ताकि निवेशकों और उनके वारिसों को वास्तविक राहत मिल सके।
दस्तावेजों के लिए नई व्यवस्था
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, किसी निवेशक की मृत्यु के बाद संपत्ति के हस्तांतरण के लिए एक सत्यापन योग्य मृत्यु प्रमाण पत्र जरूरी होगा। इसके लिए मूल मृत्यु प्रमाण पत्र, नामांकित व्यक्ति द्वारा सत्यापित प्रति, नोटरी या राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित प्रति या क्यूआर कोड वाला मृत्यु प्रमाण पत्र मान्य होगा। वहीं, कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र तहसीलदार से नीचे के स्तर के राजस्व अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया जाना चाहिए।
छोटे दावों के लिए तय की नई सीमा
SEBI ने छोटे दावों के मामलों में एसटीपी प्रणाली के तहत नई मौद्रिक सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत भौतिक रूप में रखी प्रतिभूतियों के लिए 10,000 रुपये और डीमैट प्रतिभूतियों के लिए 30,000 रुपये तक के दावे सीधे और सरल तरीके से निपटाए जा सकेंगे। इससे बहुत छोटे निवेशों के मामलों में वारिसों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
सरलीकृत दस्तावेजीकरण की सीमा बढ़ेगी
इसके अलावा सरलीकृत दस्तावेजीकरण के तहत भी सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक भौतिक रूप से रखी प्रतिभूतियों के लिए यह सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये और डीमैट प्रतिभूतियों के लिए 30 लाख रुपये तक की जा सकती है। इससे मध्यम स्तर के निवेशों के मामलों में भी वारिसों को अपेक्षाकृत आसान प्रक्रिया का लाभ मिल सकेगा।
नामांकन होने पर प्रक्रिया और आसान
SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर निवेशक ने पहले से किसी को नामांकित किया हुआ है, तो संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया और आसान हो जाएगी। ऐसे मामलों में नामांकित व्यक्ति को केवल हस्तांतरण अनुरोध फॉर्म, डीमैट खाते की ताजा ग्राहक मास्टर सूची (सीएमएल), मृत्यु प्रमाण पत्र और एक वैध पहचान पत्र जमा करना होगा। इन दस्तावेजों के आधार पर निवेश को वारिस के नाम पर स्थानांतरित किया जा सकेगा। सेबी का मानना है कि इन प्रस्तावित बदलावों से निवेशकों के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी और निवेश से जुड़े दावों का निपटान पहले की तुलना में अधिक तेज और सरल तरीके से किया जा सकेगा।
