Vedanta Share Price: मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने मंगलवार को अनिल अग्रवाल माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड को डिविडेंड के भुगतान में देरी के लिए स्कॉटिश एक्सप्लोरर केयर्न को 77.62 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही अनिल अग्रवाल के भाई नवीन और बेटी प्रिया सहित कंपनी के पूरे बोर्ड को कैपिटल मार्केट के एक्सेस से रोक दिया है। इस खबर के बीच बुधवार को वेदांता का शेयर फोकस में रहेगा। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 76 पेज के आदेश में कहा कि वेदांता को 45 दिनों के भीतर 77.62 करोड़ रु का भुगतान करना होगा। वरना कंपनी को आगे की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
वेदांता करेगी Cairn को ब्याज का भुगतान
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2011 में हुई थी डील
वेदांत ने 2011 में केयर्न एनर्जी पीएलसी की भारतीय यूनिट, केयर्न इंडिया लिमिटेड में अधिकांश हिस्सेदारी खरीदी थी। केयर्न की केयर्न इंडिया में थोड़ी हिस्सेदारी बरकरार रही, जिसे बाद में इसकी पैरेंट वेदांता लिमिटेड में मर्ज कर दिया गया।
ये है पूरा मामला
2014 में आयकर विभाग ने 2006 में केयर्न इंडिया के रिऑर्गेनाइजेशन और लिस्टिंग को लेकर स्कॉटिश एक्सप्लोरर से 10,247 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड की थी। टैक्स विभाग ने केयर्न एनर्जी की बाकी हिस्सेदारी कुर्क कर ली थी, जबकि वेदांता ने विवाद का हवाला देते हुए डिविडेंड का भुगतान करना बंद कर दिया।
फिर यूके की कंपनी ने टैक्स डिमांड का विरोध करते हुए डिविडेंड भुगतान रोकने के लिए सेबी से संपर्क किया। सेबी ने अपने आदेश में कहा कि वेदांता ने जनवरी 2014 और जून 2017 के बीच यूके फर्म को भुगतान किए जाने वाले डिविडेंड को रोककर कानून का उल्लंघन किया है।
अब करना होगा ब्याज का भुगतान
टैक्स विभाग की कुर्की मार्च 2016 में समाप्त हो गई। केयर्न एनर्जी ने सेबी को 2017 में अपनी शिकायत में कहा कि उसे 2017 तक डिविडेंड का भुगतान नहीं किया गया था और कंपनी इस लेट डिविडेंड पर ब्याज का भुगतान प्राप्त करने की हकदार है।
