बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर ब्रोकर और अन्य वित्तीय कंपनियों के विज्ञापनों के लिए नए नियम बनाए हैं। इन नियमों के तहत कंपनियां अपने ब्रांड का प्रचार करने के लिए मशहूर हस्तियों की मदद ले सकेंगी। हालांकि, वे किसी खास फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस को अच्छा बताकर उसका प्रचार नहीं कर सकेंगी।
फाइनेंशियल प्रोडक्ट के विज्ञापनों पर सेबी ने कड़े किए नियम (Photo: iStock)
किन कंपनियों पर लागू होंगे नए नियम?
न्यूज एजेंसी भाषा (पीटीआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेबी की नई विज्ञापन संहिता शेयर ब्रोकर, डिपॉजिटरी प्रतिभागियों, निवेश सलाहकारों, रिसर्च एनालिस्ट, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म, पोर्टफोलियो मैनेजर और म्यूचुअल फंड कंपनियों पर लागू होगी। इन कंपनियों को अपने ब्रांड या कंपनी की पहचान बढ़ाने के लिए मशहूर हस्तियों को विज्ञापन में शामिल करने की अनुमति होगी। हालांकि, विज्ञापन में कंपनी की सेवाओं या उत्पादों के नाम बताए जा सकते हैं, लेकिन किसी खास उत्पाद या सेवा को बेहतर बताने या उसके बारे में दावा करने की इजाजत नहीं होगी।
विज्ञापन से पहले लेनी होगी मंजूरी
सेबी ने साफ किया है कि किसी मशहूर हस्ती को शामिल करने वाले विज्ञापन के लिए संबंधित निगरानी संस्था से पहले मंजूरी लेनी होगी। अगर किसी कंपनी के लिए ऐसी कोई संस्था तय नहीं है, तो उसे सेबी से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, मशहूर हस्तियों को विज्ञापन में शामिल करने पर होने वाला खर्च ग्राहकों से नहीं वसूला जा सकेगा। म्यूचुअल फंड कंपनियां भी यह खर्च अपनी योजना से नहीं निकाल सकेंगी। विज्ञापनों में जरूरी चेतावनी और जानकारी देना भी अनिवार्य होगा।
रेटिंग और रैंकिंग के इस्तेमाल पर भी नियम
कंपनियां कुछ शर्तों के तहत विज्ञापनों में केवल पूर्व जोखिम और प्रतिफल के सत्यापन के लिए निर्धारित एजेंसी की रेटिंग या रैंकिंग का इस्तेमाल कर सकेंगी। इसके लिए रेटिंग या रैंकिंग का मतलब विज्ञापन में समझाना होगा। साथ ही, निवेशकों को अधिक जानकारी देने के लिए संबंधित एजेंसी या कंपनी की वेबसाइट का लिंक भी दिया जा सकता है। सेबी ने शैक्षणिक सामग्री को इन विज्ञापन नियमों से बाहर रखा है। यानी निवेश से जुड़ी जानकारी देने वाली शैक्षणिक सामग्री पर ये नियम लागू नहीं होंगे।
छोटे डिजिटल विज्ञापनों में देना होगा लिंक
सेबी ने एसएमएस, पॉप-अप और मोबाइल पर आने वाले छोटे संदेशों में संक्षिप्त जानकारी देने की अनुमति दी है। अगर अक्षरों की सीमा के कारण इनमें सभी जरूरी जानकारी और चेतावनी देना संभव नहीं है तो कंपनी को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध पूरी जानकारी का लिंक देना होगा। इससे निवेशक जोखिम से जुड़ी जरूरी बातें पढ़ सकेंगे।
इसके अलावा, सेबी ने रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च संस्थाओं को संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के नियम में भी ढील दी है।
