Trading Window: कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI कुछ ट्रांजेक्शन से जुड़ी Trading Window में कुछ बदलाव कर सकता है। सेबी इस पर विचार कर रहा है। मामले में सेबी की तरफ से एक कंसलटेशन लेटर जारी किया गया है। इस लेटर के जरिए सेबी ने आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। नए बदलावों के तहत कुछ लेनदेन को ट्रेडिंग विंडो प्रतिबंधों से छूट मिल सकती है। इस कदम के लिए नॉन-कंवर्टिबल सिक्योरिटीज को खरीदने समेत कुछ लेनदेन को ट्रेडिंग विंडो प्रतिबंध मानदंडों से छूट देना है।
सेबी ट्रेडिंग विंडो में बदलाव कर सकता है
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क्या हैं पीआईटी नियम
बता दें कि सेबी अंदरूनी व्यापार निषेध विनियम, 2015 (PIT) इनसाइडर डीलिंग पर बैन लगाता है। इसका मतलब है कि वो सेंसिटिव जानकारी जिसके जरिए किसी सिक्योरिटी की कीमत प्रभावित हो।
इस मामले में PIT नियमों में ट्रेडिंग विंडो को बंद करने का तब आदेश दिया गया है, जब कंपनी का कम्प्लायंस ऑफिसर यह तय कर ले कि नामित शख्स के पास UPSI हो सकती है। इस दौरान ऐसे शख्स और उनसे करीबी रिश्तेदारों को भी सिक्योरिटीज में ट्रेड करने से रोक दिया जाता है।
क्या चीजें नहीं होंगी शामिल
सेबी ने अपने ताजा प्रस्ताव में कहा कि एक बदलाव हुआ है जिसके तहत यह प्रोविजन किया गया है कि ट्रेडिंग विंडो प्रतिबंध उन लेनदेन पर लागू नहीं किए जाएंगे, जो अन्य चीजों के साथ-साथ बोर्ड की तरफ से बनाए गए नियमों के अनुसार किए जाते हैं।
इनमें वारंट या डिबेंचर के कंवर्जन की खरीदना, राइट्स इश्यू सब्सक्रिप्शन, फॉलो-ऑन ऑफर, बायबैक ऑफर में शेयरों की प्रेफ्रेंशियल अलॉट मेंटर टेंडरिंग, ओपन ऑफर, डीलिस्टिंग ऑफर शामिल हैं।
