SEBI Chief Warning : भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय (Tuhin Kanta Pandey) ने शेयर बाजार में हेरफेर करने वालों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के जरिए कैश मार्केट को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों पर सेबी तुरंत और सख्त कार्रवाई करेगा। मुंबई में फिक्की (FICCI) के 23वें कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस 2026 के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि नए सिस्टम के तहत बाजार की निगरानी करने और गड़बड़ियों को पकड़ने की सेबी की क्षमता पुरानी व्यवस्था की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।
SEBI का बड़ा वार: क्लोजिंग ऑक्शन में हेरफेर करने वालों पर एक्शन की तैयारी, SME मार्केट के भी बदलेंगे नियम (तस्वीर- istock/Ani/AI)
पुराने VWAP की तुलना में ज्यादा पारदर्शी है नया सिस्टम
शेयर बाजार में शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए पहले 'वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस' (VWAP) प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता था। अगस्त 2026 में सेबी ने पारदर्शिता बढ़ाने और आखिरी समय में होने वाली कीमतों की हेरफेर को रोकने के लिए नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू किया। सेबी अध्यक्ष ने कहा कि अगर कोई यह सोचता है कि वह नए सिस्टम में कीमतें मैनिपुलेट करके बच निकलेगा, तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि कैश मार्केट को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था लाई गई है। हमारी निगरानी तकनीक अब इतनी बेहतर है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सकता है।
म्यूचुअल फंड्स और प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स की भागीदारी बढ़ी
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक तुहिन कांत पांडेय ने बताया कि नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में निवेशकों और संस्थानों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। म्यूचुअल फंड्स ने कैश मार्केट में अपनी भागीदारी में काफी इजाफा किया है, वहीं प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स भी इस नए तंत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। सेबी का मानना है कि जैसे-जैसे ट्रेडर्स और निवेशकों की समझ इस सिस्टम को लेकर बढ़ेगी, भागीदारी में और ज्यादा सुधार आएगा। फिलहाल नियामक इस बात का अध्ययन कर रहा है कि ट्रेडिंग के रास्ते में क्या व्यावहारिक बाधाएं आ रही हैं ताकि उन्हें दूर किया जा सके।
SME प्लेटफॉर्म में सुधार के लिए लाया जाएगा कंसल्टेशन पेपर
सम्मेलन के दौरान सेबी प्रमुख ने स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (SME) सेगमेंट से जुड़ी समस्याओं पर भी बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि मौजूदा नियमों की वजह से छोटी कंपनियों को कई व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके व्यापार और शेयरों की ट्रेडिंग पर बुरा असर पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या शेयर बाजार में 'ऑड लॉट्स' बनने की है, जिसकी वजह से आम निवेशकों के लिए एसएमई कंपनियों के शेयर खरीदना या बेचना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा सेबी ने एसएमई प्लेटफॉर्म पर मार्केट मेकर्स की कार्यप्रणाली और उनकी बढ़ती लागत को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों की तुलना में एसएमई सेगमेंट में अंडरराइटिंग का खर्च काफी ज्यादा है, जिससे नई कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ता है।
जल्द लागू होंगे व्यापक सुधार
एसएमई प्लेटफॉर्म की इन समस्याओं को दूर करने के लिए सेबी जल्द ही एक व्यापक सुधार प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसके लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा, जिसमें बाजार के जानकारों, निवेशकों और कंपनियों से सुझाव मांगे जाएंगे। सेबी का उद्देश्य एसएमई प्लेटफॉर्म को अधिक सुलभ, कम खर्चीला और पारदर्शी बनाना है ताकि छोटी और मध्यम स्तर की कंपनियां बिना किसी रुकावट के पूंजी जुटा सकें।
