मार्केट रेगुलेटर SEBI ने वित्तीय सेवाएं देने वाली कंपनी Gretex Corporate Services पर सख्त कदम उठाया है। कंपनी पर 21 दिनों तक नए मर्चेंट बैंकिंग प्रोजेक्ट्स लेने पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि Gretex ने नियमों का पालन नहीं किया और एक SME IPO में जरूरी जांच (ड्यू डिलिजेंस) ठीक तरह से नहीं की।
क्यों हुई कार्रवाई?
SEBI की जांच में सामने आया कि वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान Gretex के पास मर्चेंट बैंकर के लिए आवश्यक कम से कम ₹5 करोड़ की नेटवर्थ नहीं थी। यह नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसी कारण कंपनी को नए असाइनमेंट लेने से अस्थायी रूप से रोका गया।
क्या है पूरा मामला?
SEBI ने Gretex Corporate Services पर 21 दिनों का बैन लगाया है क्योंकि कंपनी ने Jayant Infratech के IPO में सही ड्यू डिलिजेंस नहीं की और निवेशकों को पूरी जानकारी नहीं दी। जांच में पाया गया कि IPO की रकम का लगभग 40% हिस्सा ऑफिस किराए के लिए उपयोग होना था, लेकिन जिस ऑफिस के लिए यह राशि दिखाई गई, वह उस समय तक बन ही नहीं पाया था। इसके बावजूद Gretex ने सिर्फ एक साइट विजिट कर जानकारी को सही मान लिया और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स लेने में लापरवाही की।ये भी पढ़ें : Lenskart IPO: खुल गया चश्मा बनाने वाली कंपनी का आईपीओ, आपको सब्सक्राइब करना चाहिए या नहीं?
SEBI के मुताबिक यह ऊपरी स्तर की जांच (perfunctory due diligence) थी और इससे निवेशकों को गलत जानकारी मिली। इतना ही नहीं, Gretex ने 2019-20 में ₹5 करोड़ की न्यूनतम नेटवर्थ की शर्त का भी पालन नहीं किया था और उस समय इसका खुलासा भी नहीं किया, जिसे SEBI ने गंभीर गलती माना। इसी वजह से Gretex को तुरंत प्रभाव से नए मर्चेंट बैंकिंग प्रोजेक्ट लेने से रोक दिया गया है। हाल के समय में SME IPOs में जबरदस्त तेजी आई है और इसी को देखते हुए SEBI खास तौर पर इस सेगमेंट की मॉनिटरिंग बढ़ा चुका है, ताकि छोटे निवेशकों को गुमराह होने से बचाया जा सके और बाजार में पारदर्शिता बरकरार रहे।
