Dollar vs Rupee : भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 96.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। सिर्फ इस हफ्ते में रुपया 90 पैसे से ज्यादा टूट चुका है। लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ रुपया एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है। शुक्रवार को रुपया 0.3% टूटकर 96.05 प्रति डॉलर पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले गुरुवार को 95.95 का ऑल टाइम लो बना था। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, डॉलर की मजबूती और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है।
डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो पर
पेट्रोल-डीजल महंगा, महंगाई का नया खतरा
केंद्र सरकार ने शुक्रवार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। सरकार का मकसद बढ़ती वैश्विक सप्लाई अनिश्चितताओं के बीच ईंधन खपत को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड 109 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में डॉलर महंगा और तेल महंगा होने का डबल झटका सीधे भारत के इम्पोर्ट बिल पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है, तो भारत का चालू खाता घाटा यानी CAD तेजी से बढ़ सकता है। इसका असर रुपये, बॉन्ड यील्ड और महंगाई तीनों पर दिखाई देगा।
डॉलर क्यों मजबूत हो रहा?
अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बाद अब फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की उम्मीद कम हो गई है। इसी वजह से डॉलर इंडेक्स लगातार चौथे दिन मजबूत हुआ। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच हुई बैठक से भी बाजार को कोई बड़ा समाधान नहीं मिला। खासकर ईरान, ताइवान और चीन-ईरान ऊर्जा संबंधों पर जारी तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश यानी डॉलर की तरफ धकेला।
सरकार ने शुरू की ‘डैमेज कंट्रोल’ रणनीति
सरकार ने बाहरी दबाव को देखते हुए कई कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। गुरुवार को सरकार ने एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट को 100 किलोग्राम तक सीमित कर दिया। इसके बाद अब पेट्रोल-डीजल कीमतें बढ़ाकर ईंधन खपत नियंत्रित करने की कोशिश की गई है। माना जा रहा है कि सरकार का फोकस डॉलर आउटफ्लो कम करने और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को नियंत्रण में रखने पर है।
क्या 100 प्रति डॉलर की तरफ बढ़ रहा है रुपया?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड 110 डॉलर के ऊपर बना रहता है और डॉलर इंडेक्स मजबूत रहता है तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिकी फेड की नीति, ईरान संकट और विदेशी निवेशकों का रुख तय करेगा कि रुपया 100 प्रति डॉलर की तरफ जाएगा या स्थिरता लौटेगी।
