Dollar Vs Rupee: ईरान संकट का हल नहीं निकलने और कच्चे तेल में उबार का असर भारतीय करेंसी रुपये पर लगातार हो रहा है। अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपया टूट रहा है। मंगलवार को रुपया टूटकर शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सर्वकालिक निचले स्तर 95.63 पर पहुंच गया।
रुपये में गिरावट
मंगलवार, 12 मई को रुपया 32 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। बता दें कि फरवरी के अंत में ईरान संघर्ष के बढ़ने के बाद से ही रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। बीच-बीच में जो भी थोड़ी-बहुत सुधार की स्थितियां दिखीं, उन्हें मुख्य रूप से केंद्रीय बैंक के छिटपुट हस्तक्षेपों से ही सहारा मिला।
अभी सुधार की उम्मीद बहुत कम
भविष्य का परिदृश्य अभी भी अस्थिर बना हुआ है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति बहुत कम हुई है। हालाँकि दोनों पक्षों ने 8 अप्रैल को संघर्ष-विराम समझौते पर सहमति जताई थी, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प की हालिया टिप्पणियों से ऐसा लगता है कि यह संघर्ष-विराम अब कमज़ोर पड़ रहा है। जतीन त्रिवेदी, वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी एंड करेंसी), LKP सिक्योरिटीज के अनुसार, पीएम मोदी द्वारा कच्चे तेल और सोने जैसे आयात पर निर्भरता घटाने के बयान के बाद बाजार में सतर्कता है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ा है। अगर रुपया 95.50 के नीचे बंद होता है, तो हम जल्द ही 1 डॉलर की कीमत 96 रुपये देख सकते हैं।
कच्चे तेल में उछाल से बिगड़ा गणित
सोमवार को ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ अमेरिका का सीजफायर "लाइफ सपोर्ट पर है। उन्होंने कुछ जरूरी मांगों पर असहमति की ओर इशारा किया, जैसे कि अलग-अलग मोर्चों पर लड़ाई रोकना, अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, ईरान के तेल निर्यात को फिर से शुरू करना, और युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजा देना। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हाल ही में $102 प्रति बैरल से ऊपर आई तेजी ने भारत की बाहरी स्थिरता को लेकर चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है, क्योंकि तेल की ज्यादा कीमतों से आयात बिल बढ़ जाता है, डॉलर की मांग बढ़ जाती है, और रुपये पर दबाव पड़ता है
