दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया स्मॉल कैप पर बड़े बड़े दांव से मोटा पैसा बनाने के लिए जाना जाता है। लेकिन, वे कैसे ऐसे शेयर चुनेते हैं, जिनमें बड़ा पैसा बनता है। क्यों उन्हें भारतीय बाजार का बिग व्हेल कहा जाता है। उनकी इस निवेश यात्रा को CA मनीष गोयल ने डिकोड किया है।
आशीष कचोलिया कंपनियों की कमाई को मानते हैं अहम
गोयल के मुताबिक उनकी निवेश यात्रा की दिलचस्प बात यह है कि वह उन कंपनियों में मौके तलाशते हैं, जिन्हें बाजार अभी पूरी तरह पहचान नहीं पाया है। लेकिन उनकी रणनीति सिर्फ छोटी कंपनियों में पैसा लगाने की नहीं है। वह कारोबार की क्षमता, प्रतिस्पर्धी बढ़त और उसे बड़े स्तर पर ले जाने की संभावना पर ध्यान देते हैं।
कैसे बनाया ₹3400 करोड़ का पोर्टफोलियो?
आशीष कचोलिया ने अपने करियर की शुरुआत Prime Securities से की थी। इसके बाद उन्होंने Edelweiss के Equity Research Desk पर काम किया। बाद में Lucky Securities नाम से अपना ब्रोकिंग कारोबार शुरू किया और 2003 से अपना निजी निवेश पोर्टफोलियो बनाने पर फोकस किया।
उन्होंने बड़े और स्थापित शेयरों के बजाय मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में नए निवेश के मौके तलाशे। Pokarna, Vadilal, Camlin, Axiscades Engineering, Acrysil और Shaily Engineering Plastics जैसी कंपनियां उनके निवेश इतिहास में शामिल रही हैं। The Economic Times की 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक, वह निवेश से पहले काफी रिसर्च करते थे और बड़े निवेश की स्थिति में कंपनी के मैनेजमेंट से भी मिलते थे।
कैसे चुनते हैं स्मॉलकैप शेयर?
कचोलिया की निवेश सोच को समझने के लिए उनकी एक सार्वजनिक टिप्पणी बेहद अहम है। उन्होंने कहा है कि वह ऐसे अच्छे कारोबार तलाशने की कोशिश करते हैं, जिनके पास प्रतिस्पर्धियों से बचाव करने वाली स्थायी बढ़त हो। जैसे किसी कंपनी की अपनी तकनीक, विशेष मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, बड़े ग्राहकों के साथ लंबे संबंध, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क या किसी खास प्रोडक्ट में विशेषज्ञता।
केवल ग्रोथ नहीं, वैल्यूएशन पर भी नजर
कचोलिया ने नवंबर 2023 में सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया था कि वह अपने निवेश को Small Cap, Mid Cap या Large Cap के आधार पर बांटकर नहीं देखते। उनके लिए Growth, Return on Capital Employed (RoCE) और Valuation ज्यादा अहम हैं।
बाजार में गिरावट को कैसे देखते हैं कचोलिया?
25 अक्टूबर 2026 को एक सोशल मीडिया बातचीत में कचोलिया ने मौजूदा बाजार की उथल-पुथल को लेकर कहा कि ऐसे माहौल में नकदी और फोकस रखने वाले निवेशकों के लिए बड़े मौके पैदा हो सकते हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि गिरता हुआ हर शेयर खरीदने लायक हो जाता है। असली मौका तब होता है जब किसी अच्छे कारोबार की लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत बनी रहें, लेकिन बाजार की निराशा के कारण उसका वैल्यूएशन आकर्षक हो जाए।
क्या रिटेल निवेशक भी अपना सकते हैं यह रणनीति?
कचोलिया की निवेश यात्रा से छोटे निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि सिर्फ शेयर की कीमत या मार्केट कैप देखकर निवेश नहीं करना चाहिए। कंपनी का बिजनेस मॉडल, प्रतिस्पर्धी बढ़त, मैनेजमेंट का रिकॉर्ड, पूंजी के इस्तेमाल की क्षमता और वैल्यूएशन समझना जरूरी है।
इसके लिए कंपनी की सालाना रिपोर्ट, तिमाही नतीजे, कर्ज, कैश फ्लो और मैनेजमेंट की गाइडेंस का अध्ययन किया जा सकता है। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि कंपनी का विस्तार वास्तविक मुनाफे में बदल रहा है या नहीं।
