India Semiconductor Mission: भारत जल्द ही सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का एक नया फंड लॉन्च करने की योजना बना रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोट्र के मुताबिक इस फंड का मकसद चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। इससे भारत को वैश्विक चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की रणनीति को गति मिलेगी।
भारत में चिप क्रांति की तैयारी
नया मेगा सेमीकंडक्टर फंड
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत सरकार घरेलू चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 1 ट्रिलियन रुपये यानी करीब $11 अरब (₹1 लाख करोड़ से ज्यादा) का नया फंड लाने की तैयारी कर रही है। इस फंड का उद्देश्य देश में चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग उपकरण और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह योजना अभी अंतिम चरण में है और इसे अगले 2 से 3 महीनों में लॉन्च किया जा सकता है। हालांकि नीति में कुछ बदलाव भी संभव हैं।
वैश्विक चिप रेस में भारत की एंट्री
दुनिया भर में सेमीकंडक्टर सेक्टर रणनीतिक महत्व का उद्योग बन चुका है। AI, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कई देश अपनी चिप सप्लाई चेन को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े निवेश कर रहे हैं। भारत की यह पहल भी उसी रणनीति का हिस्सा है। यह कदम अमेरिका के $52 अरब के CHIPS and Science Act और चीन की विशाल सरकारी निवेश योजनाओं की तर्ज पर माना जा रहा है।
$10 अरब का मिशन पहले से चालू
यह नया फंड भारत के 2021 में शुरू किए गए $10 अरब के सेमीकंडक्टर इंसेंटिव प्रोग्राम को आगे बढ़ाएगा। उस योजना के तहत सरकार चिप प्रोजेक्ट लगाने की लागत का लगभग 50% तक समर्थन देने को तैयार हुई थी। इस नीति के बाद कई बड़े प्रोजेक्ट भारत आए हैं। अमेरिकी मेमोरी कंपनी Micron Technology गुजरात में चिप असेंबली और टेस्टिंग प्लांट बना रही है।
टाटा, फॉक्सकॉन जैसे दिग्गजों की एंट्री
भारत की चिप रणनीति में निजी कंपनियों की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है। Tata Group गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट के साथ एक अलग चिप पैकेजिंग यूनिट भी स्थापित कर रहा है। इसके अलावा Foxconn जैसी कंपनियों ने भी चिप टेस्टिंग और असेंबली से जुड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की है।
2032 तक बड़ा खिलाड़ी बनना लक्ष्य
भारत फिलहाल कम जटिल यानी लो-एंड और मिड-रेंज चिप्स के उत्पादन से शुरुआत कर रहा है। लेकिन सरकार का लक्ष्य धीरे-धीरे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में भी कदम बढ़ाना है। केंद्र सरकार ने 2032 तक भारत को ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे प्रमुख चिप उत्पादक देशों के बराबर क्षमता वाला इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रखा है।
क्यों अहम है चिप मिशन?
अगर भारत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान बना लेता है तो इससे कई बड़े फायदे होंगे। पहला, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में लागत घटेगी। दूसरा, भारत के टेक और ऑटो सेक्टर को स्थिर चिप सप्लाई मिलेगी। तीसरा, देश वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
