बीमा कंपनियों पर भी Heatwave की मार, बढ़ रहे हेल्थ और फायर क्लेम के मामले

Heatwave की मार अब बीमा कंपनियों पर भी पड़ रही है। देश भर में हीटस्ट्रोक के कारण अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों और शॉर्ट-सर्किट की वजह से आग लगने के हादसों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।

मई और जून के महीनों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान के कारण हीटस्ट्रोक (Heatwave) और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। भीषण लू की वजह से शरीर का तापमान अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे ऑर्गन फेलियर (अंगों का काम बंद करना) और ब्रेन स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो रही हैं। कई मामलों में मरीजों को तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती करना पड़ रहा है, जिसका खर्च प्रतिदिन 20,000 से 50,000 रुपये तक आ सकता है। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का यह भारी-भरकम खर्च सीधे तौर पर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के पास क्लेम के रूप में पहुंच रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इस साल मई महीने में ही हीटस्ट्रोक और गैस्ट्रोएंटेराइटिस से जुड़े क्लेम में लगभग 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

Heatwave insurance

क्या हीटस्ट्रोक (लू लगने) का इलाज बीमा में कवर होता है?

आम तौर पर लोगों के मन में यह उलझन रहती है कि क्या लू लगना एक सामान्य मौसमी बीमारी है या इसका क्लेम मिलेगा। इसका सीधा जवाब है हां, यह पूरी तरह कवर होता है। अगर कोई व्यक्ति भीषण गर्मी या लू की चपेट में आने के कारण इतना बीमार हो जाता है कि उसे डॉक्टर की सलाह पर अस्पताल में कम से कम 24 घंटे के लिए भर्ती (Hospitalization) होना पड़ता है, तो उसका बीमा क्लेम पूरी तरह मान्य होता है। इसके तहत अस्पताल के बेड का किराया, डॉक्टर की फीस, दवाइयां, डायग्नोस्टिक टेस्ट और आईसीयू का खर्च हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के नियमों के तहत कवर किया जाता है। हालांकि, अगर मरीज सिर्फ ओपीडी (OPD) में जाकर दवा लेता है और घर आ जाता है, तो सामान्य पॉलिसियों में इसका खर्च नहीं मिलता, जब तक कि पॉलिसी में ओपीडी कवर अलग से शामिल न हो।

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