Reliance-Rosneft Deal: रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट ने भारतीय प्राइवेट रिफाइनर रिलायंस को लगभग 500,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कच्चे तेल की सप्लाई करने पर सहमति जताई है। ये दोनों देशों के बीच अब तक की सबसे बड़ी एनर्जी डील है। ये 10 साल का समझौता है, जो वैश्विक आपूर्ति का 0.5% है और आज की कीमतों पर इसकी वैल्यू लगभग 13 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष है। यह भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंधों को और मजबूत करेगा।
रिलायंस-रोसनेफ्ट के बीच डील
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इंटरनेशनल सप्लायर्स के साथ कारोबार
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस ने कहा कि वह रूस समेत इंटरनेशनल सप्लायर्स के साथ काम करती है और इसकी डील बाजार की स्थितियों पर आधारित होती हैं। कंपनी ने आपूर्ति समझौतों की गोपनीयता का हवाला देते हुए वाणिज्यिक मामलों पर टिप्पणी नहीं की है।
व्लादिमीर पुतिन आने वाले हैं भारत
यह डील रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले हुई है। जबकि उधर अमेरिका के अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जनवरी में पदभार संभालते ही वह रूस और यूक्रेन पर युद्ध रोकने के लिए दबाव डालना चाहते हैं।
भारत ने रूसी तेल पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया
भारत के एनर्जी इम्पोर्ट में रूसी तेल का हिस्सा एक तिहाई से ज़्यादा है। यूरोपीय संघ (ईयू), जो पहले रूसी तेल का टॉप खरीदार था, ने यूक्रेन पर 2022 के आक्रमण के जवाब में रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिए, जिसके बाद भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक बन गया।
भारत ने रूसी तेल पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, इसलिए रिफाइनर सस्ते कच्चे तेल की आपूर्ति का लाभ उठा रहे हैं। प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल कम से कम 3 से 4 डॉलर सस्ता हो गया है।
