भारतीय कॉरपोरेट जगत की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों में शुमार टाटा संस (Tata Sons) को लेकर एक बेहद बड़ा और चौंकाने वाला अपडेट सामने आया है। देश के सेंट्रल बैंक और प्रमुख बैंकिंग रेगुलेटर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने टाटा संस की उस अर्जी को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है, जिसमें कंपनी ने नॉन-बैंक लेंडर के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराने की मांग की थी। इस बड़े फैसले के बाद अब टाटा संस के शेयर बाजार (Stock Market) में लिस्ट होने की अटकलें और संभावनाएं काफी तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि कंपनी ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए आवेदन किया था, ताकि वह अपनी प्राइवेट कंपनी की पहचान को बचाए रख सके और पब्लिक लिस्टिंग से बच सके।
क्या अब शेयर बाजार में होगी Tata Sons की एंट्री?
टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है जरुरी?
गौरतलब है कि सौ साल से भी ज्यादा पुराना टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts), टीसीएस (TCS), टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और एयर इंडिया जैसी कई दिग्गज कंपनियों को कंट्रोल करता है। नियमों के मुताबिक, टाटा संस को एक 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' के तौर पर क्लासिफाई किया गया है, जो नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सख्त नियमों के दायरे में आती है। आरबीआई के मौजूदा नियमों के अनुसार, जिन कंपनियों की कुल एसेट्स 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हैं या जिनकी पब्लिक फंड्स तक सीधी पहुंच है, उनके लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। मार्च 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, टाटा संस की स्टैंडअलोन एसेट्स का कुल आकार लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो इस नियम के दायरे को पूरी तरह स्पष्ट करता है।
अभी कैसे काम करती है टाटा संस?
अब तक टाटा संस एक अनलिस्टेड कंपनी के रूप में काम करती आई है, लेकिन पिछले कुछ समय से स्टेकहोल्डर्स की तरफ से इस पर पब्लिक होने का लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। इस ग्रुप में टाटा संस का दूसरा सबसे बड़ा शेयरहोल्डर शापूरजी पलोनजी ग्रुप (Shapoorji Pallonji Group) भी शामिल है। इसके अलावा, पिछले दिनों ग्रुप से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई थी जब टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) ने यह घोषणा की थी कि वे अपना दोबारा अपॉइंटमेंट नहीं चाहेंगे, जिससे कंपनी में अनिश्चितता का माहौल बन गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रशेखरन ने अपने इस कदम के पीछे बोर्ड से पूरा समर्थन न मिलने की बात कही थी, और यह फैसला टाटा ट्रस्ट्स के साथ महीनों तक चले आंतरिक तनाव के बाद लिया गया था।
क्या अब बाजार में एंट्री?
आरबीआई के इस कड़े रुख के बाद टाटा संस के पास अब स्टॉक मार्केट में उतरने के अलावा बहुत कम विकल्प बचे हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह अपने स्तर पर इसे प्राइवेट बनाए रखना चाहती थी, लेकिन रेगुलेटरी नियमों और केंद्रीय बैंक के फैसले ने इस राह को मुश्किल बना दिया है। यदि टाटा संस शेयर बाजार में लिस्ट होती है, तो यह भारतीय शेयर बाजार इतिहास के सबसे बड़े और सबसे चर्चित आईपीओ (IPO) में से एक साबित होगा। हालांकि, आरबीआई, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स की तरफ से इस हालिया घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन बाजार के जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में टाटा ग्रुप के इस कदम से भारतीय शेयर बाजार की दिशा में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
