RBI ने टाटा संस की प्राइवेट बने रहने की अर्जी की खारिज, क्या अब शेयर बाजार में होगी एंट्री?

भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस की प्राइवेट कंपनी बने रहने और नॉन-बैंक लेंडर का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की अर्जी को ठुकरा दिया है। इस बड़े फैसले के बाद अब देश के इस सबसे बड़े कॉरपोरेट समूह के शेयर बाजार में लिस्ट होने की राह पूरी तरह खुल गई है।

भारतीय कॉरपोरेट जगत की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों में शुमार टाटा संस (Tata Sons) को लेकर एक बेहद बड़ा और चौंकाने वाला अपडेट सामने आया है। देश के सेंट्रल बैंक और प्रमुख बैंकिंग रेगुलेटर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने टाटा संस की उस अर्जी को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है, जिसमें कंपनी ने नॉन-बैंक लेंडर के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराने की मांग की थी। इस बड़े फैसले के बाद अब टाटा संस के शेयर बाजार (Stock Market) में लिस्ट होने की अटकलें और संभावनाएं काफी तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि कंपनी ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए आवेदन किया था, ताकि वह अपनी प्राइवेट कंपनी की पहचान को बचाए रख सके और पब्लिक लिस्टिंग से बच सके।

RBI on Tata Sons Listing

क्या अब शेयर बाजार में होगी Tata Sons की एंट्री?

टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है जरुरी?

गौरतलब है कि सौ साल से भी ज्यादा पुराना टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts), टीसीएस (TCS), टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और एयर इंडिया जैसी कई दिग्गज कंपनियों को कंट्रोल करता है। नियमों के मुताबिक, टाटा संस को एक 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' के तौर पर क्लासिफाई किया गया है, जो नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सख्त नियमों के दायरे में आती है। आरबीआई के मौजूदा नियमों के अनुसार, जिन कंपनियों की कुल एसेट्स 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हैं या जिनकी पब्लिक फंड्स तक सीधी पहुंच है, उनके लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। मार्च 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, टाटा संस की स्टैंडअलोन एसेट्स का कुल आकार लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो इस नियम के दायरे को पूरी तरह स्पष्ट करता है।

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