Liquidity In Banking System : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार (10 मार्च 2026) को बैंकिंग सिस्टम में कैश की स्थिति को संभालने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद के जरिये 50,000 करोड़ रुपये डाले। इसे खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत किया गया। आरबीआई का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में तरलता बनाए रखना और भविष्य में कैश की अचानक कमी को रोकना है।
आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में डाले 50,000 करोड़ रुपये (तस्वीर-istock)
किन बॉन्ड्स की हुई खरीद
आरबीआई ने विभिन्न सरकारी बॉन्ड्स (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) खरीदे हैं। इनमें प्रमुख हैं:-
- 6.33 प्रतिशत के 2035 बॉन्ड में 13,507 करोड़ रुपये
- 6.01 प्रतिशत के 2030 बॉन्ड में 13,494 करोड़ रुपये
- 6.10 प्रतिशत के 2031 बॉन्ड में 8,157 करोड़ रुपये
- 7.30 प्रतिशत के 2053 बॉन्ड में 6,955 करोड़ रुपये
बैंकिंग सिस्टम में तरलता
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई के अनुसार, वर्तमान में बैंकिंग सिस्टम में तरलता का अधिशेष करीब 2.41 लाख करोड़ रुपये है। इसका मतलब है कि बैंक के पास जरूरत से ज्यादा कैश मौजूद है। ओएमओ के जरिए यह कैश सिस्टम में डालना इसलिए जरूरी था क्योंकि इस महीने के अंत में अग्रिम कर और जीएसटी के भुगतान होने हैं। इससे बैंकिंग सिस्टम से नकदी बड़ी मात्रा में निकल सकती थी।
ओएमओ का महत्व
ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के जरिए आरबीआई सरकारी बॉन्ड्स खरीदकर या बेचकर बैंकिंग सिस्टम में नकदी का संतुलन बनाए रखता है। जब आरबीआई बॉन्ड खरीदता है, तो बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा नकदी आती है। वहीं, जब वह बॉन्ड बेचता है, तो कैश बैंकिंग सिस्टम से बाहर जाती है। इस तरह, ओएमओ से बैंकिंग प्रणाली में तरलता बनाए रखना और महंगाई को नियंत्रित करना आसान होता है।
सालभर में कुल कैश डाली
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से अब तक केंद्रीय बैंक ने ओएमओ के जरिए सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद कर करीब 2.50 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में डाले हैं। यह दिखाता है कि आरबीआई लगातार तरलता प्रबंधन कर रहा है और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
आरबीआई की यह ओएमओ खरीद नीलामी विशेष रूप से कर और जीएसटी भुगतान के समय कैश के बड़े पैमाने पर निकास को रोकने के लिए की गई। इससे बैंकिंग सिस्टम में स्थिरता बनी रहती है और आम लोगों तथा व्यापारियों के लिए लेनदेन में कोई बाधा नहीं आती। इस कदम से यह भी संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक संतुलन और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सतत निगरानी रख रहा है।
