Reserve Bank of India ने चुपचाप बड़ा कदम उठाते हुए 104 टन से ज्यादा सोना देश में शिफ्ट कर दिया है। गोल्ड की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़कर 16.7% पहुंच गई है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक रणनीति में बड़े संकेत देता है।
रिजर्व बैंक ने मंगाया सोना
RBI का 104 टन सोना देश में लाना और गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़ाना साफ संकेत देता है कि भारत अपनी रिजर्व रणनीति को ज्यादा सुरक्षित और विविध बना रहा है। आने वाले समय में यह कदम रुपये की स्थिरता और आर्थिक मजबूती के लिए अहम साबित हो सकता है।
विदेश से भारत आया सोना
RBI ने मार्च 2026 तक के छह महीनों में 104.23 मीट्रिक टन सोना देश के भीतर ट्रांसफर किया है। इसके साथ ही कुल गोल्ड रिजर्व 880.52 मीट्रिक टन पर पहुंच गया है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे सुरक्षित संपत्तियों की अहमियत बढ़ गई है।
कहां रखा है भारत का सोना?
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक 290.37 मीट्रिक टन सोना देश में रखा गया है। वहीं 197.67 मीट्रिक टन सोना अभी भी विदेशी संस्थानों जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड (BOE) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित है। इसके अलावा 2.80 मीट्रिक टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में रखा गया है।
Forex रिजर्व में गोल्ड का बढ़ता दबदबा
सोने की कीमतों में तेजी का असर भारत के फॉरेक्स रिजर्व पर साफ दिखा है। मार्च 2026 तक गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई, जो छह महीने पहले 13.92% थी। यह बदलाव दिखाता है कि RBI धीरे-धीरे डॉलर आधारित एसेट्स से हटकर गोल्ड पर भरोसा बढ़ा रहा है।
विदेशी मुद्रा संपत्ति में बदलाव के संकेत
भारत के कुल विदेशी मुद्रा एसेट्स (FCA) 552.28 अरब डॉलर रहे, जिसमें से बड़ा हिस्सा सिक्योरिटीज में निवेश है। हालांकि, हाल के महीनों में RBI ने अपने निवेश पैटर्न में हल्का बदलाव किया है। अब ज्यादा फोकस दूसरे केंद्रीय बैंकों और BIS के पास डिपॉजिट बढ़ाने पर दिख रहा है, जबकि विदेशी कमर्शियल बैंकों में हिस्सेदारी थोड़ी घटी है।
क्या है इसके पीछे की बड़ी रणनीति?
विशेषज्ञ मानते हैं कि RBI का यह कदम सिर्फ रिजर्व मैनेजमेंट नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक अनिश्चितताओं के खिलाफ एक मजबूत कवच तैयार करना है। गोल्ड एक ऐसा एसेट है, जो करेंसी वोलैटिलिटी और वैश्विक संकट के समय स्थिरता देता है। ऐसे में RBI का यह शिफ्ट भारत की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
