कोलकाता के लाखों मेट्रो यात्रियों और दैनिक यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन के तहत आने वाले और लंबे समय से लटके 'चिंगरीघाटा क्रॉसिंग सेक्शन' (Chingrighata Section) के निर्माण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस व्यस्त क्रॉसिंग पर गर्डर लॉन्चिंग का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण काम तय समय सीमा से भी पहले आज सुबह पूरा कर लिया गया। इस सफलता के साथ ही कोलकाता मेट्रो के नेटवर्क में आ रही सबसे बड़ी बाधा अब दूर हो गई है, जिससे इस पूरे रूट पर मेट्रो परिचालन का रास्ता साफ हो गया है।
New Garia-Airport Metro Corridor
चिंगरीघाटा में इस 366 मीटर के 'मिसिंग लिंक' को जोड़ना न्यू गरिया-एयरपोर्ट मेट्रो कॉरिडोर (New Garia-Airport Metro Corridor) को पूरा करने के लिए सबसे जरूरी कदम था। यह पूरा कॉरिडोर कोलकाता की परिवहन व्यवस्था के लिए एक लाइफलाइन की तरह माना जा रहा है, क्योंकि यह कोलकाता के दक्षिणी उपनगरों (Southern Suburbs) को शहर के सबसे बड़े आईटी हब 'सेक्टर 5' (Sector V) और साल्ट लेक इलाके से सीधे जोड़ने का काम करेगा। इस लिंक के जुड़ जाने से अब आईटी प्रोफेशनल्स और आम नागरिकों को सड़क के भारी ट्रैफिक और जाम से बड़ी राहत मिलेगी और वे कुछ ही मिनटों में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
RVNL ने पूरा किया काम
इस बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के सालों तक ठप रहने के पीछे तकनीकी से ज्यादा राजनीतिक कारण जिम्मेदार थे। दरअसल, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार द्वारा इस व्यस्त चौराहे पर ट्रैफिक डायवर्जन (Traffic Diversion) यानी यातायात को दूसरे रास्तों पर मोड़ने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। निर्माण कंपनी आरवीएनएल ने काम पूरा करने के लिए लगातार दो हफ्तों के वीकेंड (शनिवार-रविवार) पर केवल रात के समय कुछ घंटों के लिए ट्रैफिक ब्लॉक की मांग की थी, ताकि आम जनता को ज्यादा परेशानी न हो। लेकिन राज्य सरकार के असहयोग और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के चलते यह अनुमति सालों तक लटकी रही, जिससे पूरा प्रोजेक्ट अधर में पड़ा रहा।
इस पूरे मामले पर अब भारी राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर इस सफलता को साझा करते हुए सीधे तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिस काम को ममता बनर्जी की सरकार पिछले 15 सालों में राजनीतिक गतिरोध के कारण पूरा नहीं कर पाई, उसे भाजपा सरकार और सुवेंदु अधिकारी के प्रयासों से महज 15 दिनों के भीतर धरातल पर उतार दिया गया। जैसे ही इस प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाली राजनीतिक अड़चनें और प्रशासनिक बाधाएं खत्म हुईं, निर्माण कार्य ने रिकॉर्ड रफ्तार पकड़ ली और आरवीएनएल ने इसे समय से पहले पूरा करके दिखा दिया।
