Public Sector Banks Meeting : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंकों (पीएसबी) के प्रमुखों की एक महत्वपूर्ण बैठक (PSBs Meeting) बुलाई है। यह बैठक 29 मई को आयोजित होगी और इसकी अध्यक्षता वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू करेंगे। खास बात यह है कि यह बैठक उनके रिटायर होने से ठीक एक दिन पहले हो रही है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा ने सूत्रों के मुताबिक बताया कि बैठक में सरकारी बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन, कृषि क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जा रहे कर्ज की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। सरकार चाहती है कि किसानों और छोटे कारोबारियों तक आसानी से लोन पहुंचे, ताकि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
सार्वजनिक बैंकों के प्रमुखों की 29 मई को वित्त मंत्रालय ने बुलाई बैठक (तस्वीर-istock)
रिकॉर्ड मुनाफे के बाद पहली बड़ी समीक्षा बैठक
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे बड़ा शुद्ध लाभ दर्ज किया है। सरकारी बैंकों का कुल शुद्ध लाभ बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। लगातार चौथे साल सरकारी बैंक मुनाफे में रहे हैं, जिससे बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। बैंकों की कमाई बढ़ने, कर्ज वितरण में सुधार और खराब ऋण यानी एनपीए में कमी आने से लाभ में बड़ा इजाफा हुआ है। इस दौरान बैंकों का कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 11.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
एनपीए में बड़ी गिरावट से मजबूत हुई बैंकिंग व्यवस्था
सरकारी बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी काफी सुधार देखने को मिला है। सकल एनपीए अनुपात घटकर 1.93 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि शुद्ध एनपीए अनुपात केवल 0.39 प्रतिशत रह गया है। यह पिछले कई वर्षों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बैंकों द्वारा खराब कर्ज की वसूली पर लगातार ध्यान देने और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने से यह सुधार संभव हुआ है। इससे बैंकिंग व्यवस्था पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत और सुरक्षित हुई है।
आरआरबी और ग्रामीण बैंकिंग पर रहेगा फोकस
बैठक में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के कामकाज और वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा होगी। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को और बेहतर बनाना चाहती है। खासतौर पर किसानों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण उद्यमियों को आसान ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण बैंकों की आय बढ़ाने, डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने और उनकी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने पर भी चर्चा हो सकती है।
डिजिटल धोखाधड़ी और एआई के इस्तेमाल पर चर्चा
बैठक में बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों पर भी गंभीर चर्चा होगी। ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ साइबर अपराधों में भी तेजी आई है। ऐसे में सरकार और बैंक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। साथ ही, बैंकों में कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी। एआई के जरिए ग्राहक सेवा बेहतर करने, धोखाधड़ी पकड़ने और बैंकिंग प्रक्रियाओं को तेज बनाने पर फोकस किया जा रहा है।
जन समर्थ पोर्टल और कर्ज वसूली व्यवस्था पर नजर
बैठक में ‘जन समर्थ’ पोर्टल की प्रगति की भी समीक्षा होगी। यह पोर्टल लोगों को विभिन्न सरकारी ऋण योजनाओं की जानकारी और आवेदन की सुविधा देता है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें। इसके अलावा, लोन वसूली अधिकरण (डीआरटी) और सरफेसी अधिनियम के तहत बैंकों द्वारा की जा रही कर्ज वसूली की स्थिति पर भी चर्चा होगी। सरकार का उद्देश्य है कि बैंकों का फंसा हुआ पैसा तेजी से वापस आए और बैंकिंग व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे बैंक
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सरकारी बैंकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। पश्चिम एशिया संकट का असर वैश्विक व्यापार, तेल कीमतों और निवेश पर पड़ सकता है। ऐसे में मजबूत बैंकिंग व्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगी। सरकार की कोशिश है कि बैंक उद्योग, कृषि और छोटे कारोबारों को पर्याप्त कर्ज देकर आर्थिक गतिविधियों को गति दें। यही वजह है कि इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।
