Crude Oil Price Impact on OMC : पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में उछाल का असर अब सरकारी तेल कंपनियों के नतीजों में साफ दिखाई देने लगा है। देश की दो बड़ी सरकारी तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल ₹16,227 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। महंगा क्रूड, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी पर कम मार्केटिंग मार्जिन और एलपीजी पर बढ़ती अंडर-रिकवरी ने दोनों कंपनियों की कमाई पर बड़ा असर डाला है। वहीं, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के पहली तिमाही के नतीजे अभी आने बाकी हैं।
महंगे क्रूड का नतीजों पर दिखा असर
HPCL को सबसे बड़ा झटका
HPCL ने जून तिमाही में ₹12,265 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹4,111 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही (Q4 FY26) में उसका लाभ करीब ₹6,065 करोड़ रहा था। कंपनी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जबकि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर पर्याप्त मार्जिन नहीं मिल पाया। इसका सीधा असर कंपनी की लाभप्रदता पर पड़ा।
BPCL भी घाटे में
भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने भी पहली तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया। कंपनी पर भी महंगे क्रूड और कमजोर मार्केटिंग मार्जिन का दबाव रहा। पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अपेक्षित मुनाफा नहीं मिलने से नतीजे प्रभावित हुए।
आय से ज्यादा बढ़ गया खर्च
HPCL की कुल आय जून तिमाही में बढ़कर ₹1.46 लाख करोड़ पहुंच गई, लेकिन कंपनी का कुल खर्च ₹1.64 लाख करोड़ हो गया। यानी आय बढ़ने के बावजूद खर्च में तेज बढ़ोतरी ने मुनाफे को घाटे में बदल दिया। विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के दौरान अगर खुदरा ईंधन कीमतों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की जाती, तो सरकारी तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ जाता है।
LPG पर बढ़ा बोझ
HPCL की एलपीजी अंडर-रिकवरी 30 जून 2026 तक बढ़कर ₹16,405.92 करोड़ हो गई, जो मार्च 2026 के अंत में ₹12,798.67 करोड़ थी। यानी रसोई गैस की बिक्री पर कंपनी का नुकसान लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, HPCL का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) जून तिमाही में बढ़कर 23.80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 3.08 डॉलर प्रति बैरल था। इसके बावजूद मार्केटिंग कारोबार में दबाव इतना अधिक रहा कि कंपनी घाटे से नहीं बच सकी।
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