PPF vs NPS: आपके लिए कौन-सा रिटायरमेंट प्लान सबसे बेहतर?

रिटायरमेंट के बाद सबसे जरूरी चीज होती है एक स्टेलब इनकम, जिससे आपका खर्च बिना किसी टेंशन के चलता रहे। इसी वजह से लोग सुरक्षित योजनाओं जैसे नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड पर भरोसा करते हैं। लेकिन इन दोनों योजनाओं में क्या अंतर है, यह समझना जरूरी है, ताकि आप अपने रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत और संतुलित फंड तैयार कर सकें।

रिटायरमेंट के लिए सही प्लान चुनना आज बहुत जरूरी हो गया है। नौकरी या बिजनेस बंद होने के बाद हर महीने आने वाली आमदनी रुक जाती है, इसलिए पहले से एक अच्छा-सा फंड बनाना जरूरी है, ताकि आगे आपकी जरूरतें आराम से पूरी हो सकें। इसी वजह से लोग सबसे ज्यादा PPF और NPS जैसे प्लान को तुलना करके देखते हैं। दोनों ही योजनाएं सरकार से जुड़ी और भरोसेमंद हैं, लेकिन इनका काम करने का तरीका, मिलने वाला रिटर्न, कितना जोखिम है और कितना टैक्स फायदा मिलता है ये सब काफी अलग हैं। ऐसे में आइये आपको बताते हैं कि PPF या NPS में से आपके लिए क्या बेहतर होगा और क्यों?

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PPF क्या है?

PPF यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड, भारत की सबसे सुरक्षित निवेश योजनाओं में से एक है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें पैसे पर कोई मार्केट रिस्क नहीं होता। ब्याज दर सरकार तय करती है और हर तिमाही बदल सकती है, लेकिन उतार-चढ़ाव सीमित होता है। PPF में आप साल में कम से कम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख तक निवेश कर सकते हैं। इसकी मैच्योरिटी अवधि 15 साल की होती है, जिसे आप चाहे तो 5-5 साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ा सकते हैं। PPF का सबसे बड़ा लाभ इसका EEE टैक्स बेनिफिट है यानि निवेश पर टैक्स छूट, ब्याज पर टैक्स छूट, और मैच्योरिटी पर भी टैक्स नहीं लगता। इस वजह से यह उन लोगों के लिए आदर्श है जिन्हें सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहिए और जो रिस्क नहीं लेना चाहते।

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