आम निवेशकों के बीच पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) काफी पॉपुलर हैं। ऐसा इसलिए कि दोनों पर निवेशकों को फिक्स रिटर्न मिलता है। साथ ही सरकारी गारंटी भी है। यानी रिस्क फ्री निवेश पर फिक्स रिटर्न। अब सवाल यह है कि यदि दोनों निवेश स्कीम की तुलना की जाए तो इनमें कौन बेस्ट है? फाइनेंशियल एक्सपर्ट का कहना है कि PPF एक लंबी अवधि की रिटायरमेंट स्कीम है, जिसमें निवेशकों को टैक्स छूट भी मिलता है। वहीं, FD बहुउद्देशीय अल्पावधि से मध्यम अवधि की इन्वेस्टमेंट स्कीम हैं जिनमें फिक्स रिटर्न के साथ टैक्स छूट का लाभ मिलता है। इनमें से किसी एक को चुनना इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक लिक्विडिटी को महत्व दे रहा या टैक्स सेविंग और कंपाउंडिंग इंटरेस्ट को।
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पीपीएफ में 15 साल की लॉक-इन अवधि
पीपीएफ 15 साल के लिए लॉक-इन अवधि है। यानी 15 साल तक पैसे निकालने की अनुमति नहीं होती है। हालांकि, सातवें साल के बाद भी निकासी की सुविधा मिलती है। इसलिए यह स्कीम रिटायरमेंट या बच्चों की शिक्षा के लिए उपयुक्त है। वहीं, दूसरी ओर, एफडी की अवधि 7 दिनों से लेकर 10 साल तक होती है और समय से पहले निकासी पर आमतौर पर जुर्माना लगता है। अगर आप अपने पैसे तुरंत निकालना चाहते हैं, तो एफडी ज्यादा सुविधाजनक है, जबकि पीपीएफ के लिए धैर्य और लगन की जरूरत होती है।
ब्याज दर और रिटर्न
पीएफ ब्याज दरों की सरकार द्वारा तिमाही समीक्षा की जाती है। वर्तमान में ये लगभग 7.1% प्रति वर्ष हैं, जो सालाना चक्रवृद्धि होती हैं। रिटर्न पूरी तरह से कर-मुक्त है, और इसलिए हाई टैक्स श्रेणी वालों के लिए बेस्ट है। एफडी परिपक्वता और बैंक के आधार पर अलग-अलग ब्याज दरें प्रदान करते हैं, जो आमतौर पर 6% से 7.5% तक होती हैं। पीपीएफ आम तौर पर लॉन्ग टर्म में टैक्स सेविंग के साथ हाई रिटर्न प्रदान करता है।
सुरक्षा और जोखिम
पीपीएफ और एफडी दोनों ही सुरक्षित हैं। पीपीएफ पर सरकार की पूरी गारंटी है। बैंक एफडी, जमा बीमा के माध्यम से प्रति बैंक प्रति जमाकर्ता ₹5 लाख तक बीमित और सुरक्षित हैं। जोखिम के संदर्भ में, दोनों उत्पाद रूढ़िवादी निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन पीपीएफ में चक्रवृद्धि ब्याज के कारण दीर्घकालिक सुरक्षा और मुद्रास्फीति सुरक्षा का लाभ है।
