PPF Vs EPF: निवेश के लिए कौन बेहतर? पढ़ें रूल, ब्याज और टैक्स छूट की पूरी जानकारी

अगर आप छोटे निवेशक हैं तो PPF और EPF को लेकर कन्फ्यूजन हो सकता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है?

PPF Vs EPF: सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) और कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), भारत में लंबी अवधि की बचत के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दो लोकप्रिय इन्वेस्टमेंट विकल्प हैं। EPF मुख्य रूप से वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए है और यह उनकी नौकरी से जुड़ा होता है। वहीं PPF एक स्वैच्छिक योजना है जिसमें कोई भी व्यक्ति खाता खोलकर निवेश कर सकता है। हालांकि, ये दोनों योजनाएं टैक्स में छूट और सरकार द्वारा तय की गई निश्चित ब्याज दरें देती हैं, लेकिन पात्रता अलग हैं। आइए, इन दोनों निवेश योजनाओं के अंतर को समझते हैं।

PPF Vs EPF

पीपीएफ बनाम ईपीएफ (AI Image)

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

PPF सरकार द्वारा समर्थित एक बचत योजना है, जिसमें निवेश, मैच्योरिटी राशि और कमाए गए ब्याज पर टैक्स छूट की गारंटी मिलती है (जिसे EEE लाभ भी कहते हैं)। इस तिमाही में इसकी निश्चित ब्याज दर 7.1% है। भारत में रिटायरमेंट और टैक्स प्लानिंग के लिए इसे सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक माना जाता है, खासकर अगर आप एक रूढ़िवादी या जोखिम से बचने वाले निवेशक हैं। भारत में कोई भी पोस्ट ऑफिस, सरकारी बैंक और कुछ निजी बैंक PPF खाता खोलने की सुविधा देते हैं, जिसमें हर महीने कम से कम ₹100-500 जमा करने होते हैं। इसके लिए KYC की जरूरत होती है। PPF में कोई भी व्यक्ति सालाना ज़्यादा से ज़्यादा ₹1.5 लाख तक निवेश कर सकता है।

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